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आचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरुदेव ने किया अन्न जल का त्याग: आर्यिका श्रुतमति माताजी की असमय समाधि से क्षुब्द है आचार्यश्री


आचार्यश्री सुनीलसागर जी महाराज ने आर्यिका श्रुतमति माताजी की असमय समाधिमरण से व्यथित होकर गुरुवार से अन्न और जल का त्याग कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक अज्ञात वाहन चालक गिरफ्तार नहीं होता और उसे सजा नहीं मिलती तब तक वे निराहार ही रहेंगे। जैन समाज के वीर जिनषासन एकता संघ और विष्व जैन संगठन के पदाधिकारियों ने भी अज्ञात वाहन चालक को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है। पढ़िए इंदौर से यह खबर…


इंदौर। आचार्य श्री 108 सन्मति सागर जी महाराज से शिक्षित चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरुदेव से दीक्षित आर्यिका श्री श्रुतमति माताजी ससंघ का मंगल विहार गुरु चरण वंदना के लिए दाहोद के लिए चल रहा था। रिपोर्टर राजेश जैन दद्दू ने बताया कि गुरुवार सुबह 7 बजे से माताजी का विहार चल रहा था और 40-50 कदम ही चले थे कि पीछे से तेज रफ्तार से अज्ञात वाहन ने माताजी को टक्कर मार दी (माताजी गाड़ी के साथ 300 मीटर तक घिसटते हुए चली गईं)। इससे माताजी की समाधि हो गई।

दद्दू ने बताया कि माताजी मुंबई से विहार कर आचार्य भगवंत के दर्शनार्थ आ रही थीं। साथ ही विहार में माताजी के साथ एक श्रावक चल रहा था। उसका भी दःुखद निधन हो गया। इस घटना का समाचार आचार्य श्री को दिया गया। आचार्यश्री ने गहरा शोक प्रकट कर कहा कि जब तक वह व्यक्ति और वाहन, जिसने माता जी को टक्कर मारी गिरफ्तार नहीं होगा तब तक वे आहार और जल ग्रहण नहीं करेंगे। आचार्य श्री ने सभी प्रकार के आहार एवं जल का त्याग कर दिया। वीर जिनशासन एकता संघ के राजेश जैन दद्दू एवं मयंक जैन विश्व जैन संगठन ने गुजरात सरकार से मांग कही है कि इस घटना को अंजाम देने वाले को अतिशीघ्र गिरफ्तार किया जाए और कड़ी से कड़ी सजा दी जाए अन्यथा समग्र जैन समाज आंदोलन करेगा।

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