अभी तक देश से मृत पशुओं का निर्यात किया जाता था, लेकिन अब जिंदा पशुओं को निर्यात करने पर विचार हो रहा है। आज देशवासियों को इस बारे में गहनता से विचार कर अपनी आपत्ति दर्ज करने की जरूरत है। पढ़िए एक रिपोर्ट…
जयपुर। अभी तक देश से मृत पशुओं का निर्यात किया जाता था, लेकिन अब जिंदा पशुओं को निर्यात करने पर विचार हो रहा है। आज देशवासियों को इस बारे में गहनता से विचार कर अपनी आपत्ति दर्ज करने की जरूरत है। यह कहना है मुनि श्री सुधा सागर महाराज का। उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रस्ताव 17 जून तक पास होगा, उससे पहले देशवासियों को जागरूक होने की जरूरत है। 17 जून से पहले पशु मंत्रालय भारत सरकार को सभी अपनी आपत्तियां भेजें।
ये हमारी संपदा हैं
उन्होंने कहा कि अभी तक मृत पशुओं को एक वस्तु समझकर निर्यात किया जाता था, लेकिन क्या जिंदा पशुओं को निर्यात करना उचित है। यह हमारी भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। हमें पशुओं से प्रेम करना सिखाया गया है। ये हमारी संपदा हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह प्रस्ताव पास होता है तो यह देश पर कलंक होगा। वे कहते हैं कि मेरा शासन-प्रशासन व न्यायालय से अपील है कि यह प्रस्ताव पास न होने दें। आपत्तियां दर्ज कराने के लिए जैन-हिंदू समाज के महिला-पुरुष आगे आएं।













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