प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी का 17 जून मंगलवार को 153 वां जन्म जयंती महोत्सव है। पूरे देश में दिगंबर जैन समाज के लोग भक्ति भाव से आचार्य श्री का जन्म जयंती महोत्सव मनाएंगे। अयोध्या से पढ़िए, यह खबर…
अयोध्या। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी का 17 जून मंगलवार को 153 वां जन्म जयंती महोत्सव हैं। पूरे देश में दिगंबर जैन समाज के लोग भक्ति भाव से आचार्य श्री का जन्म जयंती महोत्सव मनाएंगे। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद, कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने कहा कि गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं। वे आचार्य श्री शांतिसागर जी की शिष्या हैं। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवनप्रकाश जैन जी ने कहा कि मंगलवार को आचार्य श्री वीरसागर जी का जन्म जयंती महोत्सव है। इसे पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री शांतिसागर जी के बारे में हम क्या ही कह सकते हैं। परम सौभाग्य है कि ऐसे चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी का वर्तमान में आचार्य पदारोहण का शताब्दी वर्ष 2024 में मनाया गया। वर्ष 1924 में उन्हें समडोली (महाराष्ट्र) में आचार्य पद पर समाज ने प्रतिष्ठापित किया था और वे बीसवीं शताब्दी में प्रथम आचार्य के रूप में इस धरती पर हम सबके लिए दिगदिगन्त बने थे।
माताजी के रूप में आचार्य श्री के दर्शन होते हैं
आज भी उन आचार्य महाराज की सारी बातें चाहे हमने दर्शन न किए हों, लेकिन गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के मुख से जब हम सुनते हैं तो ऐसा लगता है कि हमने भी आचार्य श्री शांतिसागर महाराज के साक्षात दर्शन ही कर लिए। गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के रूप में आज हमें आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का दर्शन परिलक्षित होता है क्योंकि, ज्ञानमती माता जी ने अपने जीवन में अपने गुरु शांतिसागर जी के हर आदेश को, हर संदेश को, हर उनकी बातों को अपने जीवन में अंगीकार किया है और आज वे उन्हीं शांतिसागर जी महाराज के प्रथम पट्टशिष्य आचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से दीक्षित होकर वर्ष 1956 में माधोराजपुरा (राजस्थान) में इनकी दीक्षा हुई और आज भी हम सबको विगत 73 साल से लगातार जैन धर्म के पताका फहराने का संदेश, आदेश और आशीर्वाद दे रही है।
आज ऐसे शिष्यों का मिलना भी बहुत अनूठा है
माताजी आज 92 वर्ष की हो रही हैं। जिन्होंने आचार्य शांतिसागर जी के साक्षात संदेशों को उनके साक्षात दिग्दर्शन को पूरे विश्व में गुंजायमान किया है। माताजी का कोई भी प्रवचन ऐसा नहीं होता है जब वे शांतिसागर जी महाराज के बारे में कोई विषय, कोई बात, ना बताए या उनकी जयजयकार ना करें। आज ऐसे शिष्यों का मिलना भी बहुत अनूठा है। जो अपने गुरु के भी गुरु,गुरुणां गुरु, गुरु और समस्त गुरु परंपरा को आज इस प्रकार से प्रभावित, प्रसारित करती हैं कि पूरे देश में हम सब एक आदर्श गुरु परंपरा को प्राप्त करते हैं। आचार्य शांतिसागर जी हमारी पूरी जैन समाज के आदर्श हैं।
मूलाचार ग्रंथ में बताई बातों का पालन कर रहे हैं
पूरे संत समुदाय के आदर्श हैं। उनकी ही बातों को, उनके ही बताए मार्ग को पालन करते हुए आज हमारे जैन समाज के दिगंबर जैन समाज के सारे संत समुदाय, आर्यिका माताएं, दिगंबर मुनि सभी लोग उनके बताए मार्ग पर मूलाचार ग्रंथ में बताई बातों का पालन कर रहे हैं। ऐसे आचार्य शांतिसागर जी महाराज के प्रति हमारा शत-शत नमन है। आने वाली पीढ़ी भी आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के संदेशों को और उनके बताए मार्ग पर चलते हुए जैन धर्म की पताका को फहराती रहे।ऐसी मंगल भावना है।













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