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आचार्य श्री ने समय की महत्ता समझाई : चमोली में धर्मसभा को किया संबोधित 


अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर ससंघ के नगर-नगर डगर-डगर पाव-पाव गांव-गांव बढ़ते जा रहे हैं। कुलचाराम से अष्टापद बद्रीनाथ की ओर अहिंसा पदयात्रा चल रही है। उन्होंने चमोली उत्तराखंड में अपने भक्तों को संबोधित किया। बद्रीनाथ/ कोडरमा से पढ़िए, राजकुमार जैन अजमेरा यह खबर…


बद्रीनाथ/कोडरमा। अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज जी ससंघ के नगर-नगर डगर-डगर पाव-पाव गांव-गांव बढ़ते जा रहे हैं। कुलचाराम से अष्टापद बद्रीनाथ की ओर अहिंसा पदयात्रा चल रही है। प्रकृति के समक्ष एवं कुमाऊँ हिमालय समक्ष पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य समुद्र तल से 8100 फीट की ऊंचाई पर स्थित गंगा की प्रमुख सहायक नदियों में से अलकनंदा नदी के तट पर चमोली उत्तराखंड में अपने भक्तों को संबोधित करते हुवे अन्तर्मना आचार्य भगवन ने बताया कि

उपेक्षा और अपमान यदि अपनों से बार बार मिले तो शब्दों से वाक युद्ध करना उचित नहीं है। समझदारी इसी में है कि वहाँ से दूर हो जाना चाहिए। सब समय का खेल है। कूड़े-कचरे के दिन भी बदलते हैं। समय ने किसी को नहीं छोड़ा, क्या राजा क्या रंक, क्या अमीर क्या गरीब, क्या सेठ क्या भिखारी। सबने समय की मार खाई है। इतिहास को देखो, वर्तमान को महसूस करो और भविष्य को संवारो।

समय का सम्मान करने वाले वंदनीय हो जाते हैं

जिसने समय का सम्मान किया। समय ने उसका सम्मान किया। कभी ये मत कहो- हम टाइम पास कर रहे हैं। ये भी मत कहो- समय बोझ है इसे ढो रहे हैं। आप स्वयं सोचो बोझ कौन ढोता है -इन्सान या गधा?

समय का सम्मान करने वाले वंदनीय और अभिनंदनीय हो जाते हैं और उनका यशोगान युगों-युगों तक किया जाता है। समय का धैर्य पूर्वक सदुपयोग हमें निखारता है। जैसे- सम्मेद शिखर की यात्रा रात्रि 1 या 2 बजे से चलना शुरू करते हैं। एक-एक कदम चलते-चलते पारसनाथ टोंक पर पहुंच जाते हैं। समय, साहस और श्रम ने यात्री को लक्ष्य तक पहुँचा दिया। वैसे ही कार्य करते रहो और समय का इन्तजार करो, फल जरूर मिलेगा।

समय बोध ही कर्तव्यबोध का पाठ पढ़ाता है

हम उजास और उल्लास की गति को तभी पकड़ सकते हैं, जब समय के साथ कदम ताल करेंगे। इसलिए समय के महत्व को समझें और सही दिशा में सही उपयोग करें। समय ही है, जो हमारे भविष्य का निर्माता है। समय, श्रम और साहस की त्रिवेणी हमें सफलताओं के शीर्ष पर पहुँचा देती है। जिन्होंने समय को समझा, समय ने उन्हें समझदार बना दिया। समय को आदर्श बनाने वाले, समय आने पर समाज एवं राष्ट्र के अनुकरणीय और आदर्श पुरुष बन जाते हैं। समय बोध ही कर्तव्यबोध का पाठ पढ़ाता है। इसलिए अपने दैनिक जीवन की समय सारणी बनाएं और समय के सार को पाएं। अन्यथा बंदर के हाथ में समय की छुरी। हमारी यात्रा भी आदिनाथ भगवान के निर्वाण स्थली की ओर बढ़ रही है। मनोज जैन हैदराबाद, विवेक जैन गंगवाल कोलकाता, मनीष सीमा जैन आदि ने बहुत-बहुत अनुमोदना की है।

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