भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 14 दिसंबर का दिन इतिहास रच गया। आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी, उपाध्याय श्री पीयूष सागर जी, मुनिश्री सहज सागर जी, मुनिश्री नवपद्य सागर जी, मुनिश्री अप्रमत्त सागर जी और मुनिश्री परिमल सागर जी छह दिगंबर मुनिराजों एवं आर्यिका माता जी सहित अंतर्मना संघस्थ 15 पिच्छीधारियों ने नई लोकसभा भवन, पुराना संसद भवन और राष्ट्रपति भवन का अवलोकन किया। नईदिल्ली से पढ़िए, यह खबर…
नई दिल्ली। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 14 दिसंबर का दिन इतिहास रच गया। आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी, उपाध्याय श्री पीयूष सागर जी, मुनिश्री सहज सागर जी, मुनिश्री नवपद्य सागर जी, मुनिश्री अप्रमत्त सागर जी और मुनिश्री परिमल सागर जी छह दिगंबर मुनिराजों एवं आर्यिका माता जी सहित अंतर्मना संघस्थ 15 पिच्छीधारियों ने नई लोकसभा भवन, पुराना संसद भवन और राष्ट्रपति भवन का अवलोकन किया। संबंधित अधिकारियों ने हर जगह का और वहां होने वाले क्रिया कलापों की जानकारी बड़े ही विनम्र भावों से सभी आचार्य संसघ संतों को दी।
लोकसभा की कार्रवाई किस प्रकार चलती है, कौन कहां बैठता है, कैसे वोटिंग होती है, सभी को अच्छी तरह से समझाया गया। राष्ट्रपति भवन में भी सेंट्रल हॉल, भोजन कक्ष, विदेशी अतिथियों से मिलने का स्थान, पूरा विवरण, अमृत उद्यान (मुगल गार्डन) आदि की जानकारी दी गई। सभी जगह उपस्थित, अधिकारीगण, विदेशी पर्यटक व भारतीय दर्शक भी इतने बड़े संघ को देखकर आश्चर्य चकित हो रहे थे।













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