चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने उद्बोधन दिया। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की एक रिपोर्ट…
चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि साधु संतों का कर्तव्य
जैसे बंदरिया का बच्चा माँ से चिपका रहता है माँ को कॉटता नहीं है ऐसे हैं साधु संतों का कर्तव्य है समाज आप की माँ है इसको काटो मत ये आप की रक्षा करने वाली है।
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