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चातुर्मासरत आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ एवं आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज ससंघ का नगर से मंगल विहार : समाजजनों ने नम आखों से विहार करवाया 


आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ एवं आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार पोदनपुरम की ओर हुआ। आर्यिका माता जी पिछले 5 माह से नगर में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान हो कर धर्म की प्रभावना कर रही थी। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट…


सनावद। सनावद नगर में पिछले 4 माह से अपनी ओजस्वी वाणी से सभी को रसपान करवाने वाली गणीनी आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ एवं आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार पोदनपुरम की ओर हुआ। आर्यिका माता जी पिछले 5 माह से नगर में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान हो कर धर्म की प्रभावना कर रही थीं। उनके सानिध्य में अनेक मंडल विधान आयोजित किए गए। उनके द्वारा निरंतर धर्म की प्रभावना की जा रही थी। आप सनावद से दिल्ली की ओर विहार करेगी। उनके विहार के पूर्व सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका अनंतमति माताजी ने कहा कि हमारे द्वारा जो भी ज्ञान की बातें आप को बताई। आप उस पर जरूर अमल करेंगे।

उन्हें अपने जीवन में उतारेंगे। उन्होंने जिस प्रकार 5 माह तक प्रतिदिन सब ने मिलकर स्वाध्याय किया है। आशा करते हैं आप आगे भी इसी तरह सभी मिलकर यह स्वाध्याय निरंतर जारी रखेंगे।

साधु नदी में निरंतर बहते हुआ पानी की तरह है – आर्यिका सरस्वती माताजी

गणिनी आर्यिका सरस्वती माताजी ने अपने वाणी का रसपान करवाते हुए कहा कि साधु नदी में निरंतर बहते हुआ पानी की तरह है। चलता रहता है। सनावद में चतुर्मास करना हमारे जीवन का अभी तक सार्थक एवं यादगार चातुर्मास रहा। साधु तो सिर्फ़ आप के मन के मेल को धोने आते हैं। हम तो सिर्फ एक निमित्त होते हैं। हम तो सिर्फ ज्ञान देने आए थे। आप ने जो भी हमसे ज्ञान अर्जित किया आप निरंतर उसे यूंही आगे भी भुना पायेंगे।

सच्ची भावनाएं प्रकट कीं

इस अवसर पर आर्यिका माताजी ससंघ के प्रति मंजुला भूच, संगीता पाटोदी, संतोष बाकलीवाल, प्रशांत जैन ने भी नम आंखों से अपनी सच्ची भावनाएं प्रकट कीं। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।

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Shreephal Jain News

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