समाचार

सम्मेद शिखर जी तीर्थ से उग्र विहार करते हुए पहुंचे असम : आचार्य श्री‌ प्रमुख सागर जी महाराज का‌ हुआ ऐतिहासिक भव्य मंगल प्रवेश


आचार्य प्रमुख 108 श्री प्रमुख सागर‌ जी महाराज ससंघ का सम्मेद शिखर जी तीर्थ से उग्र विहार होते हुए असम की सीमा में धूबड़ी में‌ गाजे-बाजे के साथ सैंकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में जयकारों की ध्वनि के साथ सुबह लगभग 8:00 बजे मंगल प्रवेश हुआ। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


गुवाहाटी। पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य 108 श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज के प्रियाग्र शिष्य परम पूज्य आचार्य प्रमुख 108 श्री प्रमुख सागर‌ जी महाराज ससंघ का सम्मेद शिखर जी तीर्थ से उग्र विहार होते हुए असम की सीमा में धूबड़ी में‌ गाजे-बाजे के साथ सैंकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में जयकारों की ध्वनि के साथ सुबह लगभग 8:00 बजे मंगल प्रवेश हुआ।

राज्य अतिथि घोषित

आचार्य श्री की तपस्या का प्रभाव अलौकिक है। इनकी तपस्या का तेज अब दिखने लगा है। गुरुवर के दर्शन व एक झलक पाने को लालायित भक्तों की भीड़ एवं उनका तप-त्याग-संयम यह परिलक्षित करता है कि धरती पर फिर से‌ समकालीन महावीर ने‌ जन्म लिया है। अध्यात्म योगी आचार्य‌ प्रमुख सागर‌ जी‌ महाराज की तपस्या का ही प्रभाव‌ है कि असम सरकार‌ द्वारा भी असम‌ सीमा में‌ प्रवेश‌ के‌ साथ ही ससंघ को राज्य‌ अतिथि के रूप में घोषित कर‌ दिया जो जिनशासन की अद्भुत प्रभावना को भी प्रमाणित करता है।

जैन-जैनेतर समाज ने की अगवानी

यह गुरुवर की तपस्या का ही प्रभाव है कि इतनी भीषण गर्मी-सर्दी तथा अनेक परिषह को सहते हुए भी सम्मेद शिखर तीर्थ से‌ पद विहार की प्रलंब दूरी तय करता हुआ संघ निर्विघ्न धूबड़ी पहुंचा। पद विहार के मार्ग में‌ जगह-जगह जैनेतर समाज भी आचार्य श्री की आगवानी करते नजर आया तथा अपने- अपने‌ हिसाब से पूजा-अर्चना करते हुए आचार्य श्री के प्रति अपने भक्तिभाव को प्रकट किया। जब आचार्य‌ श्री‌ ने जैन धर्म के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने की अपने सोच के साथ धूबड़ी के चौराहे पर प्रवचन करने की अपनी‌ मंशा समाज के सामने जाहिर की तो तुरंत ही सरकार‌ व समाज सक्रियता दिखाते हुए नजर आया। श्री दिगम्बर जैन‌ पंचायत गुवाहाटी (असम) के अध्यक्ष महावीर जैन हाथीगोला और मंत्री बीरेंद्र कुमार सरावगी ने बताया कि यह बहुत कम दिखाई पड़ता है कि सरकार द्वारा पूरा क्षेत्र प्रतिबंधित कर दिया गया हो तथा सम्पूर्ण सामाजिक व्यवस्था के तहत वहां आचार्य श्री का शानदार प्रवचन हुआ, जिसमें जैन एवं जैनेतर की काफी संख्या में उपस्थिति देखी गई। यही भक्तों की भीड़ भगवान महावीर के समय‌ की याद दिलाती है।

शीघ्र होगा विहार 

प्राप्त जानकारी के अनुसार पूज्य आचार्य श्री का धूबड़ी से शीघ्र ही विहार होने की संभावना है। इनके आगे से आगे पद-विहार की गति स्पष्ट इंगित करती है कि इनका इस वर्ष का चातुर्मास गुवाहाटी में होना संभावित है। अगर ऐसा ही होता है‌ तो यह गुवाहाटी समाज का असीम पुण्य का योग होगा। कहा गया भी है‌ कि संतों‌ के चरण और वर्षायोग का पुण्य किसी अमृत पुण्य से कम नहीं होता।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
2
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

You cannot copy content of this page