निमाड़ की माटी के लाल नगर गौरव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 35ंवा आचार्य पदारोहण दिवस समाज जनों के द्वारा बड़े हर्सोल्लास व भक्तिभाव से मनाया। आचार्य श्री का सामूहिक पूजन में भिन्न भिन्न प्रकार के अर्घ्य व नेवैद्य समर्पित किए गए। पढ़िए सन्मति जैन की रिपोर्ट…
सनावद। निमाड़ की माटी के लाल नगर गौरव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 35ंवा आचार्य पदारोहण दिवस समाज जनों के द्वारा बड़े हर्सोल्लास व भक्तिभाव से मनाया। सन्मति जैन ने बताया कि इस अवसर पर दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में प्रातः7 बजे से सुनील मास्टर साब, अचिंत्य जैन, नवनीत जैन, रदेश जैन, कमल जटाले सहित सभी समाजजनों द्वारा भव्य पंचामृत अभिषेक किया गया। तत्पश्चात आचार्य श्री का सामूहिक पूजन में भिन्न भिन्न प्रकार के अर्घ व नेवैद्य,पुष्पा जैन, मीना जटाले,अंजू पाटनी, पुष्पा जैन ,सरला जैन,के द्वारा समर्पित किये गए।
तत्पश्चात सभी भक्तों के द्वारा आचार्य श्री के चित्र के समक्ष सभी के द्वारा भक्ति की गई। जैसा कि सभी को ज्ञात है कि आज साक्षात चारित्र चक्रवर्ती 20 वी सदी के प्रथमआचार्य शान्ति सागर जी के चरित्र को चरितार्थ कर पूरे विश्व मे वो उनकी परम्परा का निर्वहन कर रहे हैं। एक ऐसी शान एक ऐसी विभूति जिन्होंने एक नहीं दो नहीं तीन तीन बार बाहुबली भगवान के महा मस्तकाभिषेक करवाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। लोग एक बार जाने को तरसते हैं कि एक बार गोमटेश्वर बाहुबली भगवान के दर्शन हो जाएं लेकिन जब भी इतिहास लिखा जाएगा जब जब बाहुबली भगवान के साथ आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का नाम भी लिखा जाएगा।
एक ऐसे आचार्य जिन्होंने एक साथ तीन-तीन बार भगवान बाहुबली के पंचकल्याणक महा मस्तकाभिषेक कराने का सौभाग्य प्राप्त किया है। ऐसे आचार्य का गुणगान करना अतिशयोक्ति नही होगी। 35वर्ष पूर्व आषाढ़ सुदी दूज व तारीख के हिसाब से 24 जून 1990 को पारसोला राजस्थान में आचार्य श्री 108 अजीत सागर जी महाराज के द्वारा आपको आचार्य पद प्रदान किया गया था। आप वर्तमान में बांसवाड़ा में विराजमान होकर धर्म की प्रभावना कर रहे हैं।













Add Comment