जैन संत आचार्य श्री ज्ञेयसागर महाराज का वर्षायोग ज्ञानतीर्थ क्षेत्र में विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साथ सानंद चल रहा है। ज्ञानतीर्थ पर वर्षायोग के लिए विराजित जैन संत तप, त्याग, संयम की प्रतिमूर्ति दिखाई देते हैं। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…
मुरैना। जैन संत आचार्य श्री ज्ञेयसागर महाराज का वर्षायोग ज्ञानतीर्थ क्षेत्र में विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साथ सानंद चल रहा है। ज्ञानतीर्थ पर वर्षायोग के लिए विराजित जैन संत तप, त्याग, संयम की प्रतिमूर्ति दिखाई देते हैं। आचार्य श्री ज्ञानसागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर महाराज (ससंघ) का पावन वर्षायोग कलश स्थापना दो जुलाई को ए बी रोड धौलपुर आगरा हाइवे पर स्थित श्री दिगम्बर जैन ज्ञानतीर्थ क्षेत्र मुरैना में हो चुकी है। पूज्य गुरुदेव ज्ञेयसागर महाराज के संघस्थ मुनिश्री ज्ञातसागर महाराज, मुनिश्री नियोगसागर महाराज, क्षुल्लक श्री सहजसागर महाराज, ब्र.महावीर जैन, ब्रह्मचारिणी बहिन अनीता दीदी, मंजुला दीदी, ललिता दीदी भी ज्ञानतीर्थ पर चातुर्मास कर रहीं हैं।
भौतिकता से दूर हैं जैन संत ज्ञेयसागर महाराज
ज्ञानतीर्थ में वर्षायोग कर रहे जैन संत ज्ञेयसागर जी महाराज क्षेत्र के शांति प्रिय, सुरभ्य प्राकृतिक वातावरण में आत्म साधना में लीन होकर कठोर तप कर रहे हैं । वैसे तो दिगम्बर जैन संत चौबीस घंटे में केवल एकबार ही संकल्प पूर्वक अन्न जल ग्रहण करते है, लेकिन आचार्य ज्ञेयसागर महाराज एक दिन आहार लेते हैं और दूसरे दिन व्रत रखते है। यानी कि वे 48 घंटे में केवल एकबार ही अन्न जल ग्रहण कर रहे हैं । आधुनिक चकाचौंध और भौतिकता से दूर आध्यात्मिक चिंतन के साथ पूज्य गुरुदेव आत्म कल्याण के लिए साधना में लीन हैं। ऐसी भीषण गर्मी में भी दिगम्बर संत कूलर, पंखा एवं ए सी आदि का उपयोग नहीं करते।
आचार्य ज्ञेयसागर महाराज ने फागुन अष्टाहिका पर्व में निरंतर आठ दिन का निर्जल उपवास किया था। अपने पूरे आठ दिन बिना अन्न जल ग्रहण किए व्रत रखकर नवें दिन अन्न जल ग्रहण किया था। ऐसी निर्दोषचर्या का पालन करने वाले आध्यात्मिक संत कालिकाल में भी कठोर तप के माध्यम से आत्मकल्याण के पथ पर अग्रसर हैं। ऐसे संत के चरणों में शीश झुकाने, चरण रज पाने, आशीर्वाद लेने के लिए प्रतिदिन सैकड़ों लोग आते हैं और उनके दर्शन कर अपने आपको सौभाग्यशाली समझते हैं।













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