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जैन समाज में छाया हर्ष : आदिनाथ निर्वाण स्थली अष्टापद पर आचार्य अंतर्ममना प्रसन्नसागरजी महाराज ने पहुंचने की दी स्वीकृति


प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की निर्वाण स्थली अष्टापद बद्रीनाथ पर अगले वर्ष (2025) में कपाट आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी महाराज (अंतर्मना) के सानिध्य में खोले जाने की स्वीकृति प्रदान करने पर पूरे दिगंबर जैन समाज में हर्ष का माहौल है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू 


इंदौर। प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की निर्वाण स्थली अष्टापद बद्रीनाथ पर अगले वर्ष (2025) में कपाट आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी महाराज (अंतर्मना) के सानिध्य में खोले जाने की स्वीकृति प्रदान करने पर पूरे दिगंबर जैन समाज में हर्ष का माहौल है । इंदौर से पहुंचे अष्टापद तीर्थ के अध्यक्ष आदित्य कासलीवाल, महामंत्री कीर्ति पांड्या, कोषाध्यक्ष अमित कासलीवाल, ट्रस्टी ललित बड़जात्या, दिगम्बर जैन समाज सामाजिक संसद इंदौर के महामंत्री सुशील पांड्या एवं अष्टापद के ट्रस्टी सुभाष लोहड़े, संदीप, संजीव बड़जात्या, मंयक बडजात्या, कोलकता ने हैदराबाद में चातुर्मास रत कुलचारम तेलंगाना में आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज (अंतर्मना) से स्वीकृति एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। महाराज ने अष्टापद बद्रीनाथ आने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान की।

परम पूज्य आचार्य विद्यानंद जी महाराज के आशीर्वाद से निर्मित एवं जैन रत्न स्व.श्री देवकुमारसिंहजी कासलीवाल समाज भूषण स्व. श्री कैलाशचंद जी चौधरी एवं पूर्व अध्यक्ष जैन रत्न स्व. श्री प्रदीप कुमारसिंहजी कासलीवाल की कर्मस्थली है । वहां पर करीब 200 धर्मालुओं आवास-निवास की सम्पूर्ण व्यवस्था है।

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