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आचार्यश्री ने अंतिम क्षण तक पंचामृत अभिषेक देखा: त्रि-दिवसीय शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव का हुआ हुआ समापन 


गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का 74वें संयम दिवस एवं 92वें जन्म जयंती के अवसर पर श्री भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि बडी मूर्ति दिगंबर जैन मंदिर अयोध्या में त्रि-दिवसीय शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव का समापन हुआ। इससे पहले प्रथम दिन महोत्सव का शुभारंभ झंडारोहण के साथ हुआ। अयोध्या से पढ़िए, यह खबर…


अयोध्या। गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का 74वें संयम दिवस एवं 92वें जन्म जयंती के अवसर पर श्री भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि बडी मूर्ति दिगंबर जैन मंदिर अयोध्या में त्रि-दिवसीय शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव का समापन हुआ। इससे पहले प्रथम दिन महोत्सव का शुभारंभ झंडारोहण के साथ हुआ। झंडारोहण करने का सौभाग्य अशोक शकुंतला जैन चांदवाड़ जयपुर को प्राप्त हुआ। प्रथम दिवस आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का आचार्य पदारोहण शताब्दी वर्ष समापन एवं आचार्य श्री वीरसागरजी, आचार्य श्री नेमिसागर जी के मुनि दीक्षा शताब्दी दिवस के उपलक्ष्य में सुबह मंदिर जी में 31 फीट उत्तुंग भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक किया गया। आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की प्रतिमा का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। इसके बाद आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज विधान किया गया। इसमें 108 अर्घ्य मंडल पर समर्पित किए गए। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने बताया कि गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के संघस्थ ब्रम्हचारी प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन के अनुसार आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने आचार्य श्री का गुणानुवाद प्रवचन के माध्यम से किया। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री श्रमण संस्कृति के गौरव थे। जिन्होंने आज दिगंबर जैन मुनियों के मार्ग को प्रशस्त किया है।

तीर्थक्षेत्र कमेटी पर बनाई हुई फिल्म का लोकार्पण 

गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने कहा कि आचार्यश्री के समाधि से पूर्व एक माह कुंथलगिरी तीर्थ में रहकर मुझे बहुत नजदीक से आचार्यश्री की प्रत्येक चर्या को, उनकी संल्लेखना को देखने का सौभाग्य प्राप्त मिला। तीन बार मैंने आचार्यश्री के अपने जीवन में दर्शन किए एवं आचार्यश्री की पट्ट परंपरा के सभी आचार्यों को देखा है एवं दर्शन किए हैं। आचार्यश्री का जीवन एक आदर्श था। जिन्होंने अंतिम क्षण तक पंचामृत अभिषेक देखा है। कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों का स्वागत भाषण से सम्मान डॉ. जीवन प्रकाश जैन (राष्ट्रीय मंत्री भारत दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी) ने किया। तीर्थक्षेत्र कमेटी पर बनाई हुई फिल्म का लोकार्पण किया गया। इसमें तीर्थक्षेत्र कमेटी के संदर्भ में सुंदर भजन की प्रस्तति एवं समस्त तीर्थों के चित्र दिखाए गए।

श्री ज्ञानमती पुरस्कार समर्पण

श्री दिगंबर जैन त्रिलोक शोध संस्थान-जम्बूद्वीप हस्तिनापुर का गणिनी श्री ज्ञानमती पुरस्कार का समर्पण जम्बूप्रसाद गाजियाबाद को किया गया। उनके साथ में उनके सुपुत्र गण संजय जैन, पंकज जैन (सपरिवार) उपस्थित हुए। सम्मान में दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान के सभी पदाधिकारियों ने जम्बूप्रसाद का तिलक माल्यार्पण कर प्रशस्ति पत्र दिया गया। जिसमें संस्थान के पदाधिकारियों में मुख्य रूप से पूज्य स्वामी, अनिल मनोज मेरठ, विजय दरियागंज दिल्ली, प्रदीप जैन, खारीबावली, आदीश जैन सर्राफ लखनऊ, डॉ. जीवन प्रकाश जैन, प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन हस्तिनापुर का योगदान रहा। प्रशस्ति का वाचन डॉ. अनुपम जैन इंदौर ने किया। इस अवसर पर भरत चक्रवर्ती भोजनालय का उद्घाटन सोना देवी सेठी की स्मृति में विनोद कुमार आनंद सेठी एवं समस्त सेठी परिवार डीमापुर ने किया।

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