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जो जैसा है उसे वैसा ही मानो यही सम्यक दर्शन है : मुनि शुद्ध सागरजी ने अपने प्रवचन में बताई महत्ता 


जोलाना से विहार कर डडूका प्रवासरत आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री शुद्ध सागरजी महाराज प्रतिदिन प्रातः अपने प्रवचनों के माध्यम से डडूका में ज्ञान गंगा बहा रहे हैं। सोमवार को प्रातः अपने श्री मुख से शांति धारा अभिषेक पाठ कर मुनि श्री ने भक्तों को धर्म लाभ पहुंचाया। डडूका से पढ़िए, यह खबर…


डडूका। जोलाना से विहार कर डडूका प्रवासरत आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री शुद्ध सागरजी महाराज प्रतिदिन प्रातः अपने प्रवचनों के माध्यम से डडूका में ज्ञान गंगा बहा रहे हैं। सोमवार को प्रातः अपने श्री मुख से शांति धारा अभिषेक पाठ कर मुनि श्री ने भक्तों को निहाल कर दिया। समाज अध्यक्ष राजेश कुमार शाह, जैन युवा समिति अध्यक्ष अंकित डी शाह, सचिव सुमित शाह,राजेंद्र कोठिया, धनपाल शाह, रीतेश शाह, रमनलाल शाह, अनिल कोठिया, बदामीलाल कोठिया, जय कुमार शाह, केशवलाल शाह, सुधीर सेठ, निवेश शाह, अजीत बी शाह, मनोज एस शाह, मनोज के शाह, प्रदीप सेठ,भरत जैन, राजमल शाह, सूरजमल शाह, अजीत कोठिया, रीतेश आर शाह, योजक शाह, दिनेश जे शाह, मितेश शाह,अशोक एम शाह, सहित सभी समाजजनों ने मुनि श्री का पाद प्रक्षालन किया।

समाजजनों ने मुनिश्री को डडूका प्रवास हेतु श्रीफल भेंट किया। इस अवसर पर मुनि श्री ने सम्यक ज्ञान पर तत्व चर्चा करते हुए कहा कि जो जैसा है, उसे वैसा ही स्वीकारना सम्यक ज्ञान है। उन्होंने कर्म सिद्धांत की विशेष व्याख्या श्रीपाल मेना सुंदरी की कथा सुनाते हुए की। शाम को गुरु भक्ति ओर वैयावृति में भी सभी समाज जन सम्मिलित हुए।

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Shreephal Jain News

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