बागड़ प्रांत की प्राचीन धार्मिक नगरी नौगामा (बांसवाड़ा) में दसलक्षण महापर्व पर श्रुतधाम बीना से आए बाल ब्रह्मचारी संदीप जी सरल भैया और राकेश जैन के सान्निध्य में अद्वितीय धर्म प्रभावना सम्पन्न हुई। योग, पूजन, प्रवचन, संस्कार महोत्सव, दुर्लभ आगम ग्रंथ प्रदर्शनी और शोभायात्रा ने श्रद्धालुओं को गहन धार्मिक अनुभव प्रदान किया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
नौगामा, राजस्थान की ऐतिहासिक भूमि पर 28 अगस्त से 9 सितम्बर 2025 तक दसलक्षण महापर्व अत्यंत भव्यता और अध्यात्मिक प्रभावना के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रमों का नेतृत्व श्रुततीर्थ श्रुतधाम बीना (म. प्र.) से आए ब्रह्मचारी संदीप जी सरल भैया एवं राकेश जैन ने किया।
प्रतिदिन सुबह अर्हमयोग, प्राणायाम और ध्यान से दिन की शुरुआत होती थी, जबकि सामूहिक पूजन और शांतिधारा में समाज की अनुपम भागीदारी देखने को मिली। तत्वार्थ सूत्र की वाचना और सोलह कारण भावनाओं की विवेचना सभी के लिए अविस्मरणीय रही। दोपहर में जिनागम प्रवेश कक्षाओं के माध्यम से जैन दर्शन के गूढ़ विषयों पर प्रकाश डाला गया।
ताड़पत्र, हस्तलिखित और स्वर्णलिखित आगम ग्रंथों की दुर्लभ प्रदर्शनी
संध्या में प्रतिक्रमण, प्रवचन और प्रश्नमंच का आयोजन हुआ, जहाँ श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे। 3 सितम्बर को संस्कार महोत्सव में 200 से अधिक युवाओं और बच्चों ने अष्टमूलगुण पालन, व्यसन त्याग, आत्महत्या व भ्रूणहत्या त्याग जैसे संकल्प लिए। धूप दशमी पर ताड़पत्र, हस्तलिखित और स्वर्णलिखित आगम ग्रंथों की दुर्लभ प्रदर्शनी ने सभी को पहली बार अद्भुत अनुभव कराया। सुगंध दशमी पर आदिनाथ मंदिर से विशाल शोभायात्रा निकाली गई जिसमें पुरुष श्वेत वस्त्रों में और महिलाएं केसरिया परिधान में धर्मध्वजा लेकर चलीं।
आर्यिका श्री पवित्रमति माताजी, आर्यिका श्री विज्ञानमती माताजी, मुनि श्री शुद्धसागर जी और मुनि श्री विनम्रसागर जी के सान्निध्य में दुर्लभ ग्रंथों के दर्शन और सभाएं आयोजित हुईं।
समापन पर नगर में रथोत्सव के तहत निकाली शोभायात्रा
इस अवसर पर ब्राह्मी सुंदरी बालिका मंडल, अनेकांत स्वाध्याय मंडल और वीर बालक मंडल का गठन हुआ। समापन पर नगर में रथोत्सव के अंतर्गत चाँदी-पित्तल के रथ में भगवान की शोभायात्रा निकाली गई। तालाब बस स्टैंड पर विशेष कार्यक्रम हुआ जिसमें तपस्वियों और विद्वानों का सम्मान किया गया तथा सांगानेर संस्थान जयपुर से आए अनुभव शास्त्री का सान्निध्य प्राप्त हुआ। यह आयोजन न केवल धर्म प्रभावना का माध्यम बना बल्कि समाज को एकजुट करने और युवा पीढ़ी में संस्कार जगाने का अमूल्य प्रयास भी सिद्ध हुआ।













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