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1008 मंत्रों से भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक : आचार्य श्री के गुरु उपकार दिवस महोत्सव शुरू


 आचार्यश्री विनम्रसागर जी के 23 वें गुरु उपकार दिवस के अवसर पर तीन दिवसीय कार्यक्रम की बेला में शुक्रवार को प्रथम दिवस श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ एवं चंदाप्रभु भगवान का जलाभिषेक हुआ। सनावद से पढ़िए सन्मति जैन काका की , यह खबर…


सनावद। नगर में पिछले 11 दिनों से निरंतर धर्म की गंगा प्रवाह कर रहे आचार्यश्री विनम्रसागर जी के 23 वें गुरु उपकार दिवस के अवसर पर तीन दिवसीय कार्यक्रम की बेला में शुक्रवार को प्रथम दिवस श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ एवं चंदाप्रभु भगवान का आचार्य विनम्र सागर जी महाराज के मुखारबिंद से 1008 सहस्त्र नाम के मंत्रों से जलाभिषेक हुआ। समाज प्रवक्ता सन्मति काका ने बताया कि मूलनायक भगवान पर प्रथम जलाभिषेक करने का सौभाग्य राजेशकुमार जटाले को प्राप्त हुआ। साथ ही सुनील पांवणा, कमल कुमार केके, अखिलेश घाटे, रहदेष जैन, मनोज जैन, सुधीर जैन, आशीष जैन, हर्षित जैन, सुदेश जटाले, प्रत्यूष जैन, प्रशांत जैन, विशाल सराफ, महावीर जैन, शरणम् जैन, प्रवीण जैन, रजत जैन, सोनू जैन, वीरेन्द्र बाबा, कमलेश भूच को प्राप्त हुआ। वहीं पार्श्व नाथ भगवान की वृहद शांति धारा करने का सौभाग्य राबिन प्रद्युम्न कुमार जैन महेश्वर परिवार को प्राप्त हुआ एवं अन्य पाषाण के पार्श्वनाथ भगवान पर शांतिधारा करने का सौभाग्य रजत कुमार जैन एवं रहदेष जैन एवं चंदा प्रभु भगवान पर शांतिधारा करने का सौभाग्य अनुभव कुमार सराफ को प्राप्त हुआ।

जो अपनी आत्मा को मानता है वही समदृष्टि है

अगली कड़ी में आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में सभा का शुभारंभ आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर हुआ। आचार्य विराग सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट एवं पूजन करने का सौभाग्य सुधीरकुमार, प्रशांत जैन पुत्र पुलकित जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर आचार्य विनम्रसागर जी ने कहा कि सम्यक दृष्टि ने जो अपना आत्मा के स्वरूप का जो निश्चय कर कर लिया था। मेरी आत्मा का शुद्ध है तो आत्मा का स्वरूप कैसा है और अशुद्ध आत्मा कैसी है। अशुद्ध आत्मा ही शुद्ध होती है। ऐसा उन्होंने निश्चय कर लिया था। उसे उन्होंने निश्चय कर लिया था। उसे सिद्ध भगवान के उस स्वरूप को जाना। जो अपना नहीं मानता है। सिर्फ अपनी आत्मा को मानता है। वही समदृष्टि है। जो अंतर आत्म होता है। वो आत्मा के गुणों को देखता है और जो बाहरी आत्म होता है। बाहर की वस्तुओं को ही अपना समझता है। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।

आज रचाया जाएगा भक्तामर मंडल विधान

आचार्य श्री विनम्रसागर जी भक्तामर वाले बाबा के सानिध्य में आचार्य शांतिसागर वर्धमान देशना संत भवन में 48 परिवारों द्वारा भक्तामर मंडल विधान रचाया जाएगा। साथ ही विधान पश्चात पूरे आचार्य संघ की आहार चर्या बड़े मंदिर के हाल में संपन्न होगी। वहीं शाम को पार्श्वनाथ बड़े मंदिर जी में 48 दीपों से भक्तामर दीप आराधना की जाएगी।

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