मुनिश्री योगसागरजी महाराज का संघ सहित शनिवार को चांदखेड़ी में आगमन हुआ और जब से अतिशय क्षेत्र पर आगमन हुआ है तब से क्षेत्र और नगर के वातावरण में भी परिवर्तन दिखाई दे रहा है। मंदिर में चहल-पहल एवं भक्तों का आना बढ़ चुका है । चांदखेड़ी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…
चांदखेड़ी। मुनिश्री योगसागरजी महाराज का संघ सहित शनिवार को चांदखेड़ी में आगमन हुआ और जब से अतिशय क्षेत्र पर आगमन हुआ है तब से क्षेत्र और नगर के वातावरण में भी परिवर्तन दिखाई दे रहा है। मंदिर में चहल-पहल एवं भक्तों का आना बढ़ चुका है एवं आसपास के क्षेत्र के लोग गुरुवर के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हुए अपने नगर में पधारने के लिए निवेदन कर रहे हैं। गुरुदेव के क्षेत्र आगमन से राजस्थान वासियों में यह आशा बढ़ गई गुरुदेव का आगमन हमारे नगर में भी होगा। प्रशांत जैन ने बताया कि सोमवार सुबह गुरुदेव संघ सहित चंद्रोदय तीर्थ चांदखेड़ी से शहर में स्थित जिनालय की वंदना के लिए गए। गुरुदेव को क्षेत्र से बैंडबाजांे के साथ जय जयकार करते हुए भक्ति भाव के साथ नगर में लाया गया। जगह-जगह गुरुदेव का पद प्रक्षालन मंगल आरती की गई।
जिनालयों के दर्शन किए
गुरुदेव ने शहर में स्थित दोनों जिनालयों की वंदना की एवं वहां की प्रतिमाओं को एक टक निहारा। महाराज श्री के सानिध्य में मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शांतिधारा अभिषेक हुए एवं मुनिश्री योगसागरजी महाराज के श्रीमुख से शांतिधारा का उच्चारण हुआ। बता दें कि श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर का भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव मुनिश्री प्रणम्य सागर महाराज सानिध्य में वर्ष 2017 में हुआ था।
इनको मिला आहारदान का सौभाग्य
गुरुदेव संघ सहित चंद्रोदय तीर्थ चांदखेड़ी पहुंचे जहां अतिशयकारी आदिनाथ भगवान की शांति धारा अभिषेक महाराज श्री संघ सानिध्य में संपन्न हुई। इसके उपरांत गुरुदेव संघ की मंगल आहारचर्या हुई। मुनिश्री श्री योगसागर जी महाराज को पडगाहन करके आहार देने का सौभाग्य ऋषभ राजमल जैन परिवार को प्राप्त हुआ। मुनिश्री निरोग सागर जी महाराज को पडगाहन करके आहार देने का सौभाग्य पदम राजेंद्र जैन हुकम काका (अध्यक्ष चांदखेड़ी), प्रकाश प्रतीक दक्ष हरसोरा परिवार कोटा वालों को प्राप्त हुआ। मुनि श्री निर्माेह सागरजी महाराज को आहारदान का सौभाग्य सत्यनारायण जैन, प्रशांत जैन, मीना जैन, उषा जैन लीमी वाला परिवार एवं ब्रह्मचारिणी रीता दीदी, ब्रह्मचारिणी अर्पण दीदी, पारसमल कांता जैन बही पार्श्वनाथ वालांे को प्राप्त हुआ।













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