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आत्मा का पुनर्जन्म: जब संयम बनता है सिद्धि का मार्ग : सात जीवों को मिलेगी जैनेश्वरी दीक्षा, देशभर से जुटेंगे श्रद्धालु


सांगानेर के कंवर जी का बाग में रविवार को भव्य दीक्षा महोत्सव आयोजित हुआ, जहां संयम और सिद्धि का सुंदर संगम देखने को मिला। सोमवार को सात जीव दीक्षा ग्रहण करेंगे। इस आयोजन ने पूरे वातावरण को अध्यात्म की खुशबू से भर दिया।


जयपुर। दीक्षा सिर्फ त्याग नहीं, आत्मा के उठान का पर्व है। रविवार को सांगानेर स्थित कंवर जी का बाग में आयोजित जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव में यह दृश्य हर किसी के मन में बस गया। जैसे-जैसे मंत्र गूंजे, माहौल भक्ति की लहरों में डूबता गया।आचार्य सुन्दर सागर ने अपने प्रभावशाली प्रवचन में कहा— “संयम ही सिद्धि का पहला कदम है।” उनके साथ आचार्य शशांक सागर सहित पांच संघों के सान्निध्य में 38 पिच्छिकाओं के साथ अनेक धार्मिक विधानों का आयोजन हुआ।

गणधर विलय विधान का आयोजन

गणधर विलय विधान में भगवान आदिनाथ से लेकर महावीर स्वामी तक के 1452 गणधरों की महाअर्चना कराई गई। इन्द्र-इन्द्राणियों का भव्य श्रृंगार और 48 मंत्रों के साथ प्रस्तुत हुए 48 काव्यों ने हर किसी को अभिभूत कर दिया। विदेश से आए श्रद्धालु पीटर ने भी आचार्य से आशीर्वाद लेकर भावविभोर हो गए।

गुरु उपकार दिवस और 72 अर्घ्य का चढ़ाव

जैन भजनों और मंत्रोच्चार के बीच मंडल पर 72 अर्घ्य चढ़ाए गए। इस अवसर पर आचार्य विमल सागर का दीक्षा दिवस ‘गुरु उपकार दिवस’ के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम का समापन वैरागियों के विदाई उत्सव से हुआ।

सोमवार को सात जीवों को जैनेश्वरी दीक्षा मिलेगी

समाजश्रेष्ठी महावीर सुरेन्द्र जैन ने बताया कि सोमवार सुबह नौ बजे भव्य शोभायात्रा के साथ दीक्षार्थी कंवर जी का बाग में प्रवेश करेंगे। देशभर से श्रद्धालु इस पुण्य अवसर के साक्षी बनेंगे।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बसें

गौरव अध्यक्ष राजीव जैन ने जानकारी दी कि श्रद्धालुओं के लिए जयपुर की विभिन्न कॉलोनियों से नि:शुल्क बसों की व्यवस्था की गई है। ध्वजारोहण समाजश्रेष्ठी सत्य नारायण, अमित और दिनेश मित्तल ने किया।

संयम का अभ्यास और भजन संध्या

दीक्षार्थियों को संयम जीवन का अभ्यास कराया गया और उनके जीवन में आचार-विचार की नई शुरुआत हुई। सरकारी और निजी सेवाओं में कार्यरत रहे ये मुमुक्षु अब संयम और साधना के मार्ग पर आगे बढ़कर जैन धर्म की प्रभावना करेंगे। समापन पर विक्की डी. पारीख की भजन संध्या ने पूरे पांडाल को भक्ति रस से भर दिया।

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