महज 3 साल 4 महीने और 1 दिन की वियाना जैन नाम की बच्ची ब्रेन ट्यूमर से जूझ रही थी। इलाज के कई प्रयासों के बावजूद जब राहत नहीं मिली, तो जनवरी में मुंबई में उसकी सर्जरी करवाई गई। लेकिन हालत और बिगड़ती गई। बचाव की कोई उम्मीद नहीं देख, वियाना के माता-पिता पीयूष और वर्षा जैन ने 21 मार्च को उसे आध्यात्मिक गुरु राजेश मुनि महाराज के पास ले गए। मुनिश्री ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देखकर संथारा दिलाने का सुझाव दिया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। तीन वर्ष की मासूम बच्ची वियाना जैन ने जैन धर्म के सर्वोच्च व्रत संथारा को धारण कर आध्यात्मिक इतिहास रच दिया है। महज 3 वर्ष, 4 माह और 1 दिन की उम्र में संथारा लेने वाली वियाना, अब तक की सबसे कम उम्र की संथारा धारण करने वाली बनी है। ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही वियाना ने संथारा की प्रक्रिया पूरी करने के 10 मिनट बाद शांतिपूर्वक प्राण त्याग दिए।
वियाना के माता-पिता पीयूष और वर्षा जैन ने बताया कि दिसंबर 2023 में बच्ची को ब्रेन ट्यूमर हुआ था। इंदौर और मुंबई में इलाज तथा सर्जरी कराई गई, लेकिन सुधार नहीं हुआ। जनवरी में बीमारी की गंभीरता बढ़ गई। 21 मार्च को वे उसे आध्यात्मिक गुरु राजेश मुनि महाराज के पास लेकर गए। मुनिश्री ने कहा कि बच्ची के लिए एक रात भी कठिन है और संथारा ही अंतिम उपाय है।
परिवार ने संपूर्ण सहमति के साथ उसी दिन संथारा की प्रक्रिया शुरू करवाई। आधे घंटे तक धार्मिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ संथारा सम्पन्न हुआ। इसके कुछ ही मिनटों बाद वियाना ने अंतिम सांस ली।
परिवार ने बताया कि वियाना बचपन से ही धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी थी। वह गोशाला जाती थी, कबूतरों को दाना डालती थी और गुरुदेव के दर्शन करना उसकी दिनचर्या में शामिल था। वह चंचल, खुशमिजाज और धर्म-प्रेमी बच्ची थी।
मुनिश्री राजेश महाराज के लिए यह उनका 108वां संथारा था। उनके सान्निध्य और राजेन्द्र महाराज साहब के मार्गदर्शन में इस प्रक्रिया को सम्पन्न किया गया। इस विशेष संथारा को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। बीते बुधवार को कीमती गार्डन में आयोजित एक सादे और गरिमामयी कार्यक्रम में वियाना के माता-पिता को सम्मानित किया गया।
पीयूष और वर्षा दोनों आईटी प्रोफेशनल हैं। परिवार ने संथारा की बात सिर्फ करीबी परिजनों—दादा-दादी, नाना-नानी और कुछ रिश्तेदारों से ही साझा की थी।
वियाना की यह आस्था, त्याग और समर्पण की मिसाल आज पूरे समाज के लिए एक गहन संदेश बन चुकी है।













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