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आगरा में हुआ दो दिगंबर संतों का वात्सल्य मिलन: भगवान शांतिनाथ की वृहद शांतिधारा की 


मुनिश्री अमितसागर जी के शिष्य पाठशाला प्रणेता मुनिश्री अनुमान सागर जी महाराज ने 15 जून की सुबह 5 बजे पश्चिमपुरी से पद विहार कर जयपुर हाउस चौराहा होते हुए टीचर्स कॉलोनी के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर में मंगल प्रवेश किया। जहां मुनिश्री अनुमानसागर जी महाराज ने आचार्य श्री चैत्यसागर जी महाराज से चरण वंदना कर वात्सल्य मंगल मिलन किया। आगरा से पढ़िए, यह खबर…


आगरा। मुनिश्री अमितसागर जी के शिष्य पाठशाला प्रणेता मुनिश्री अनुमान सागर जी महाराज ने 15 जून की सुबह 5 बजे पश्चिमपुरी से पद विहार कर जयपुर हाउस चौराहा होते हुए टीचर्स कॉलोनी के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर में मंगल प्रवेश किया। जहां मुनिश्री अनुमानसागर जी महाराज ने आचार्य श्री चैत्यसागर जी महाराज से चरण वंदना कर वात्सल्य मंगल मिलन किया। वहां मौजूद जयपुर हाउस जैन समाज इस वात्सल्य मंगल मिलन का साक्षी बना तो वहीं आचार्यश्री एवं मुनिश्री ने मूलनायक शांतिनाथ भगवान की अति प्राचीन प्रतिमा के दर्शन कर जगत कल्याण की भावना भायी। जिसके बाद उपस्थित भक्तों ने स्वर्ण कलशों से आचार्यश्री के मुखारविंद से उच्चारित मंत्रोच्चारण के साथ मूलनायक भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा की वृहद शांतिधारा सम्पन्न की।

मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को मंगल उदबोधन में बताया कि संसार में सुखी बनना है तो मुनि बन जाओ का महत्व समझाया। इस दौरान मुनिसंघ के मंगल प्रवेश में नमोस्तु शासन संघ, मुनि त्यागी व्यवस्था के सदस्य एवं आगरा सकल जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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Shreephal Jain News

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