विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित प्राचीन भियादांत अतिशय क्षेत्र में आगामी 12 मार्च 2026, गुरुवार (चैत्र कृष्ण नवमी) को भव्य भियादांत महामहोत्सव- 2026 का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और आस्था से ओतप्रोत वातावरण में 1008 सिद्ध मंत्रों के उच्चारण के साथ महा मस्तकाभिषेक संपन्न होगा। पढ़िए राजीव सिंघई की यह विशेष रिपोर्ट…
चन्देरी (अशोकनगर)। विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित प्राचीन भियादांत अतिशय क्षेत्र में आगामी 12 मार्च 2026, गुरुवार (चैत्र कृष्ण नवमी) को भव्य भियादांत महामहोत्सव- 2026 का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और आस्था से ओतप्रोत वातावरण में 1008 सिद्ध मंत्रों के उच्चारण के साथ महा मस्तकाभिषेक संपन्न होगा।
विशिष्ट और दुर्लभ प्रतिमा
अतिशय क्षेत्र में शैलाखंड पर उकेरी गई 108 इंच ऊँची भगवान आदिनाथ जी की दिव्य प्रतिमा अपनी विशिष्ट और दुर्लभ केश-विन्यास शैली के कारण जैन शिल्पकला की अनुपम कृति मानी जाती है। यह प्रतिमा महा-अतिशयकारी के रूप में विख्यात है, जहां दर्शन और वंदन से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएँ पूर्ण होने की लोक-मान्यता है।
प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण
प्रकृति की गोद में, हरित विंध्याचल पर्वतमाला के मध्य उर्वशी ऊर नदी के पावन तट पर स्थित यह तीर्थ शांत, सात्त्विक और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। आयोजन समिति के अनुसार यह महामहोत्सव आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य एवं आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री 108 अविचल सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में तथा भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।
महामहोत्सव का विधान
महामहोत्सव के अंतर्गत स्वर्ण, रजत, पंचरत्न, तीर्थंकर और बड़े बाबा सहित विभिन्न कलशों से अभिषेक का विधान संपन्न होगा। आयोजन समिति ने बताया कि इस आयोजन से प्राप्त समस्त राशि का उपयोग पूर्ण पारदर्शिता के साथ अतिशय क्षेत्र के विकास, निर्माण कार्य, सौंदर्यीकरण और स्थायी तीर्थ सुविधाओं के विस्तार में किया जाएगा।
श्रद्धालुओं और अतिथियों के लिए व्यवस्थाएँ
महामहोत्सव के दौरान पधारने वाले साधु-संतों, विशिष्ट अतिथियों और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवास, भोजन, यातायात और अन्य मूलभूत व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएंगी। आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और तैयारियाँ प्रारंभ कर दी गई हैं।













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