विंध्यगिरि की सुरम्य पर्वतमालाओं एवं धसान नदी के पावन तट पर स्थित श्री 1008 आदिनाथ स्वामी अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी जी में बुधवार को जैन धर्म की परंपरा, तपस्या और साधना का अनुपम दृश्य उस समय साकार हो उठा। जब अनेक दिगम्बर जैन संतों का भव्य मिलन हुआ। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर…
ललितपुर। विंध्यगिरि की सुरम्य पर्वतमालाओं एवं धसान नदी के पावन तट पर स्थित श्री 1008 आदिनाथ स्वामी अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी जी में बुधवार को जैन धर्म की परंपरा, तपस्या और साधना का अनुपम दृश्य उस समय साकार हो उठा। जब अनेक दिगम्बर जैन संतों का भव्य मिलन हुआ। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धा की ऊष्मा ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इस पावन अवसर पर आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज एवं मुनि श्री शीलसागर जी महाराज, तथा आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री विभास्वरसागर जी महाराज, मुनि श्री श्रीसागर जी महाराज, मुनि श्री श्रमसागर जी महाराज एवं मुनि श्री शुद्धोपयोगसागर जी महाराज का अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी जी में मंगल मिलन हुआ। मुनि संघ के मंगल प्रवेश पर अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी कमेटी के पदाधिकारियों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं द्वारा आरती उतारकर, पादप्रक्षालन कर एवं जयघोष के साथ संतों की भव्य अगवानी की गई। संपूर्ण क्षेत्र “धर्म जयवंत हो” के घोष से गुंजायमान हो उठा।
गुरु भक्ति महाआरती एवं भजन संध्या होगी
क्षेत्र कमेटी गिरारगिरी के मीडिया प्रभारी डॉ. सुनील संचय ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रातःकाल नित्य महाभिषेक एवं शांतिधारा के साथ कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात गुरु पूजन संपन्न हुआ तथा आहारचर्या के उपरांत मुनि संघ के मंगल प्रवचन हुए। दोपहर में श्री भक्तामर दीपअर्चना का भावपूर्ण आयोजन किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर दर्शन-वंदन का लाभ लिया एवं पुण्यार्जन किया। मुनिराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी राजीव जैन सौरया परिवार, मड़ावरा को प्राप्त हुआ। क्षेत्र कमेटी के महामंत्री प्रदीप जैन, मड़ावरा ने बताया कि नववर्ष के पर अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी जी में भव्य त्रिदिवसीय धार्मिक आयोजन आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों के अंतर्गत श्री 1008 आदिनाथ स्वामी (बड़े बाबा) का महामस्तकाभिषेक तथा 25 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान के प्रमुख पात्रों के चयन का कार्यक्रम होगा। अभिषेक जैन ने बताया कि शाम 6 बजे से गुरु भक्ति महाआरती एवं भजन संध्या गायिका रितिका जैन जबलपुर द्वारा की जाएगी।
समता, संयम और विवेक यही साधक के वास्तविक आभूषण
मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि धर्म केवल कर्मकांड नहीं, अपितु आत्मा की शुद्धि की साधना है। समता, संयम और विवेक यही साधक के वास्तविक आभूषण हैं। जब मन में राग-द्वेष का क्षय होता है, तभी आत्मा की वास्तविक प्रगति संभव होती है। आप अपना नया वर्ष का शुभारंभ देव शास्त्र गुरु के सान्निध्य में ही करें। नववर्ष का स्वागत बाह्य उल्लास से नहीं, बल्कि अंतरंग परिवर्तन से होना चाहिए। अहिंसा, सत्य और आत्मसंयम को जीवन में उतारना ही सच्चा नववर्ष है।













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