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थूवोनजी में होगा भव्य शिलान्यास समारोह: मुनिश्री सुधासागर जी के मंगल सान्निध्य में नवीन जिनालयों की रखी जाएगी आधारशिला 


मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि दुनिया में गरीब बने रहो, लेकिन भगवान के द्वार पर अमीरी दिखाना। उन्होंने समझाया कि यदि अमीरी दिखानी है तो वह केवल भगवान के सामने दिखाओ। दुनिया में गरीब बनकर रहो, परंतु प्रभु के दर पर अमीर बनकर जाओ। प्रभु अंतर्यामी हैं, वे सब कुछ जानते हैं। थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…


थूवोनजी। मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि दुनिया में गरीब बने रहो, लेकिन भगवान के द्वार पर अमीरी दिखाना। उन्होंने समझाया कि यदि अमीरी दिखानी है तो वह केवल भगवान के सामने दिखाओ। दुनिया में गरीब बनकर रहो, परंतु प्रभु के दर पर अमीर बनकर जाओ। प्रभु अंतर्यामी हैं, वे सब कुछ जानते हैं। यदि संसार के सामने अमीरी दिखाई तो लुट जाओगे और यदि पड़ोसी को अमीरी दिखाई तो सबसे पहले वही शत्रु बन जाएगा। इसलिए पड़ोसी के सामने गरीब बने रहो, उसे केवल ऊपर-ऊपर की जानकारी हो पर भीतर की समृद्धि केवल प्रभु को ज्ञात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हम भगवान के समक्ष अमीर बनकर जाते हैं, तो भले ही वास्तव में अमीर न हों, एक दिन ऐसा अवश्य आता है जब हम अमीर बन जाते हैं कृ यही अमीरी पाने की सबसे सरल विधि है।

16 नवंबर को होगा नवीन जिनालयों का शिलान्यास

प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि वर्षों की प्रतीक्षा और सतत प्रयासों के बाद मध्य भारत के सबसे बड़े तीर्थ क्षेत्र श्री दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में भव्य पाषाण निर्मित पंचमुखी विशाल जिनालयों एवं सिंहद्वार के साथ-साथ श्री नंदीश्वर दीप के बावन जिनालयों का शिलान्यास 16 नवंबर को मुनिश्री सुधासागर जी ससंघ के पावन सान्निध्य में होगा। इस अवसर पर उनके साथ क्षुल्लक श्री गंभीर सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री वरिष्ठ सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री विदेह सागर जी महाराज ससंघ एवं बाल ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया भी उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन गुरुदेव के निर्देशन में पूरे विधि-विधान के साथ होगा। शिलान्यास का सौभाग्य पूर्व निर्धारित पुण्यशाली परिवार को प्राप्त होगा। इस अवसर पर सभी श्रद्धालु अपने परिवार, मित्रों सहित तीर्थ क्षेत्र पहुँचकर धर्म की प्रभावना में सहभागी बनने का आग्रह किया गया है।

तीर्थ कमेटी की अपील

दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के अध्यक्ष अशोक जैन टींगू मिल, उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र रोकड़िया, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल दीप, मंत्री शैलेंद्र दद्दा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप रानी जैन, अनिल बंसल, डॉ. जितेंद्र जैन, प्रचार मंत्री विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर अक्षय अमरोद, समाज अध्यक्ष राकेश कासंल तथा महामंत्री राकेश अमरोद सहित सभी पदाधिकारियों ने जन-जन से उपस्थिति का निवेदन किया है।

सृष्टि नहीं, दृष्टि बदलनी है 

मुनिश्री सुधासागर जी ने अपने प्रेरक प्रवचन में कहा सृष्टि नहीं, दृष्टि बदलनी है। हमारी उम्मीद है कि दुनिया सुधर जाएगी। उन्होंने बताया कि दुनिया को अपने हिसाब से बदलने का प्रयास व्यर्थ है। जो व्यक्ति स्वयं को बदल लेता है, वही सच्चा सुधारक है।

उन्होंने कहा कि गुटखा-तंबाकू छोड़ने की बात करने से लोग उल्टा उसका सेवन करने लगते हैं। इसलिए दूसरों को सुधारने की बजाय स्वयं की दृष्टि सुधारो। संसार में जो वायरस फैलते हैं, उन्हें तो नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन जो बीमारी भीतर से उत्पन्न होती है। उसे समाप्त करना कठिन होता है।

अपने गुणों को ढंककर रखो

मुनिश्री ने कहा कि धर्मशास्त्रों में लिखा है कि दूसरों की बुराइयां मत देखो और अपने गुणों को छिपाओ। हमें एक छोटी-सी सफलता मिल जाए तो हम अत्यधिक उल्लसित हो जाते हैं, परंतु विवेकवान व्यक्ति अपनी सफलता और गुणों को कभी प्रकट नहीं करता। जैसे धनवान व्यक्ति अपने धन को छिपाकर रखता है ताकि वह सुरक्षित रहे, वैसे ही अपने गुणों को भी विनम्रता से ढाँकना चाहिए। उन्होंने हंसते हुए कहा कि दुश्मन को अमीरी मत दिखाना, रिश्तेदारों को अमीरी मत दिखाना, सरकार को अमीरी मत दिखाना, और पत्नी को अमीरी मत दिखाना वरना वो तुरंत पर्ची पकड़ा देंगी।

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