विशिष्ट राम कथाकार अनुष्ठान विशेषज्ञ मुनिश्री जयकीर्तिजी रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। अकलंक एसोसिएशन के अध्यक्ष पीयूष बज सचिव अनिमेष जैन ने बताया 21से 30 नवंबर भव्य जैन रामकथा का आयोजन अकलंक स्कूल रामपुरा में भव्यता के साथ किया जा रहा है। कोटा से पढ़िए, यह खबर…
कोटा। विशिष्ट राम कथाकार अनुष्ठान विशेषज्ञ मुनिश्री जयकीर्तिजी रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। अकलंक एसोसिएशन के अध्यक्ष पीयूष बज सचिव अनिमेष जैन ने बताया 21से 30 नवंबर भव्य जैन रामकथा का आयोजन अकलंक स्कूल रामपुरा में भव्यता के साथ किया जा रहा है। पद्म पुराण पर आधारित श्री जैन रामकथा का गुरुदेव के मुखारविंद से शुभारंभ हुआ। सर्व प्रथम चेतन जैन, शीला जैन परिवार द्वारा जिनमंदिर से मां जिनवाणी माता को बैंडबाजों के साथ अकलंक स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा भव्य मंगल प्रवेश हुआ। ध्वजारोहण विधि विधान पूर्वक पीयूष, मनीष आलौकिक, स्वप्निल बज परिवार ने किया। मंडप उद्घाटन की मांगलिक क्रियाएं अंकित जैन डीएसपी एवं सकल दिगंबर जैन समाज समिति के अध्यक्ष प्रकाश बज के करकमलों से की गई। समाज के सभी गणमान्य महानुभावों ने गुरुदेव का फोटो अनावरण और दीप प्रज्वलन किया। अकलंक स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा नृत्य के माध्यम से मंगलाचरण प्रस्तुति दी गई। समाज के सभी प्रमुख श्रावक श्रेष्ठियों ने पूज्य गुरुदेव को अर्घ्य चढ़ाया। कार्यक्रम के मुख्य श्रोता राजा श्रेणिक मनोज ममता जैन सुखालपुर वाला परिवार का सभा मंडप पर भक्ति नृत्य के साथ आगमन हुआ। रविंद्र रेणु विपुल बाकलीवाल परिवार द्वारा मंगल कलश स्थापना हुई। राजा श्रेणिक की जिज्ञासा के समाधान के रूप में गुरुदेव की मंगल देशना प्रारंभ हुई।
ऐसा लग रहा था जैसे हम साक्षात् सभी अयोध्या में हैं
जैन रामकथा ने लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। लोगों में जबरदस्त उत्साह का वातावरण दिखाई दे रहा है और फिर शुरू हुई वह मंगल ध्वनि। मुनि जयकिर्तिजी के अंतह्रदय से प्रसफुटित होने वाली रामकथा का एक-एक शब्द दिल छू लेने वाला था। गुरुदेव एक श्रेष्ठ साधक के साथ एक श्रेष्ठ प्रस्तुतिकार भी है। ऐसा लग रहा था जैसे हम साक्षात् सभी अयोध्या में हैं और प्रभु श्री राम को सुन रहे हैं और वह भी हमारे कहीं आस-पास ही हैं। पूरा वातावरण चतुर्थकालीन लग रहा था। जैन राम कथा के मीडिया प्रभारी पारस जैन पार्श्वमणि पत्रकार ने बताया कि आज राम कथा के समय श्रावक-श्रेष्ठी राकेश जैन चपलमन, विमल जैन (मुवासा वाले), कैलाश जयसवाल, कमल सेठी चांदमल गंगवाल, दीप चंद पहाड़िया, महावीर ठग, चेतन प्रकाश, जवाहर जैन, जिनेंद्र पापड़ीवाल, पारस जैन, रवींद्र बाकलीवाल, सन्मति पाटनी उपस्थित थे।













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