ललितपुर के अटामंदिर में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री निर्भय सागर जी ने जीवन की सफलता हेतु आलस्य से बचने और गुरु की आज्ञा में रहने का संदेश दिया। बच्चों को करियर टिप्स और जीवन की सच्ची दिशा बताई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
ललितपुर स्थित जैन अटामंदिर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने कहा कि आलस्य जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है और गुरु सबसे बड़ा मित्र। उन्होंने बच्चों और युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता के लिए लक्ष्य निर्धारण और समर्पण भाव अनिवार्य है।
आचार्य श्री ने मित्रता के आदर्शों की व्याख्या करते हुए बताया कि जो जीवन में कठिन समय में साथ दे, एकांत में सलाह दे और व्यवहार में सरल हो वही सच्चा मित्र होता है।
मृत्यु के समय धर्म ही साथ जाता है
उन्होंने कहा – “जीवन का शत्रु अनुचित आहार है, दिन का शत्रु आलस्य है और संबंधों का शत्रु कटु वचन हैं।” उन्होंने बताया कि मृत्यु के समय धर्म ही साथ जाता है। सभा में बच्चों को भी संबोधित करते हुए उन्होंने याददाश्त बढ़ाने और लक्ष्य प्राप्ति के लिए विशेष टिप्स दिए।
प्रवचन आधारित प्रश्न मंच का आयोजन
मुनि श्री शिवदत्त सागर जी द्वारा प्रवचन आधारित प्रश्न मंच का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को पुरस्कार वितरित किए गए। कार्यक्रम में जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया सहित समाज के कई गणमान्य व्यक्ति एवं महिला मंडल ने भाग लिया। मध्यान्ह में सामूहिक पूजन और दीपप्रज्वलन का आयोजन हुआ।













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