9 दिवसीय आवासीय शिक्षण शिविर स्थानीय मोदीजी की नसिया बड़ा गणपति इंदौर में लगाया गया है। दिन में 3 समय 2-2 घंटे की क्लास होती है। जिसका समय सुबह 8 से 10, दोपहर 3 से 5 और रात्रि 7 से 9 बजे तक है। पढ़िए इंदौर से टी.के. वेदजी की यह खबर…
इंदौर। 9 दिवसीय आवासीय शिक्षण शिविर स्थानीय मोदीजी की नसिया बड़ा गणपति इंदौर में 21 से 29 दिसंबर तक लगाया गया है। आचार्य गुणधर द्वारा रचित श्री कषाय पाहुड ग्रंथ में मोहनीय कर्म के बंध, उदय, सत्व क्षय आदि का गाथा रूप में वर्णन है। आचार्य श्री नेमिचंद्र सिद्धान्त-चक्रवर्ती ने सार रूप में लब्धिसार ग्रन्थ रूप में इसे गूंथा है। सरलता से वर्तमान पद्धति में जैसे गणित आदि विषय पढ़े जाते हैं। उसी रूप में इसका प्रस्तुतिकरण है। जिसमें स्लाइड्स, चार्टस, टेबल्स, चित्र आदि का प्रयोग करके विषयवस्तु को प्रस्तुत किया गया है।
तीन समय लगती हैं क्लास
दिन में 3 समय 2-2 घंटे की क्लास होती है। जिसका समय सुबह 8 से 10, दोपहर 3 से 5 और रात्रि 7 से 9 बजे तक है। कक्षाएं प्रोजेक्टर, स्लाइड्स और बड़ी स्क्रीन के माध्यम से होती है। यह विशेष उल्लेखनीय है कि प्रवचनकार विकास सारिका छाबड़ा स्वयं टेक्नोक्रेट हैं एवं अमेरिका की बड़ी कंपनी का जॉब छोडकर यह सेवा का पुण्य कार्य कर रहे हैं एवं स्वयं अमेरिका से शिक्षित-दीक्षित हैं।
170 श्रावक बाहर से आए
इस शिक्षण शिविर में लगभग 170 श्रावक बाहर से आए हैं। जिसमें 5 ब्रह्मचारी भैया तथा 9 ब्रह्मचारी बहन भी शामिल हैं। लगभग 200 स्थानीय श्रावक भाग ले रहे हैं। शिविर में उच्च शिक्षित वर्ग भी प्रतिभागी है। जिसमें डॉक्टर, सीए, इंजीनियर्स एवं प्रोफेसर तथा वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट भी शामिल हैं। शिविर के प्रमुख संयोजक विमल चंद्र छाबड़ा एवं उनकी टीम है।
शिविर में कोई औपचारिकता नहीं
शिविर की एक प्रमुख विशेषता यह है कि पूरा समय सिर्फ धर्म कार्य व अध्यापन तथा शंका समाधान में ही लगता है। कोई औपचारिक सम्मान पुण्यार्जक, चित्र अनावरण द्वीप प्रज्जवलन वक्ता को आमंत्रण, मंच संचालन, औपचारिक निमंत्रण आदि नहीं होता है।
इनका है विशेष सहयोग
मुख्यवक्ता के गद्दी पर बैठते ही एक मिनट में कार्यक्रम प्रारंभ हो जाता है और स्वयं वक्ता ही मंगलाचरण ग्रंथ का पाठ कर कक्षा प्रारंभ कर देते हैं। इस शिविर के नाम पर किसी से दान सहयोग की अपेक्षा भी आयोजकों द्वारा नहीं की जाती है। विमल चंद्र छाबड़ा, विकास सारिका छाबड़ा, प्रकाश पूजा छाबड़ा, वीरेंद्र तृप्ति जैन, योगेन्द्र काला, दिवाकर पहाड़िया, पाटोदी आदि का विशेष सहयोग है।













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