कोडरमा. राजकुमार अजमेरा । मौन पूर्वक सिंहनिष्कडित व्रत करने वाले आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज की मौन साधना 21 जुलाई,2021 से प्रारंभ हुई थी, जो 28 जनवरी, 2023 तक रहेगी। आचार्य श्री 496 उपवास के साथ केवल 61 दिन ही आहार ग्रहण करेंगे। आचार्य श्री ने दिवली और निर्वाण महोत्सव पर अपनी मौन वाणी से बताया कि चेहरे से पहचान होती है और चरित्र से परख होती है।
दिवाली हमें अंधकार से प्रकाश की ओर, दुःख से सुख की ओर, पाप से पुण्य की ओर ले जाती है। यह पर्व हमें आत्मिक सुख की प्रेरणा देता है। दिवाली असत्य से सत्य की राह बताती है, इसलिये रात जितनी काली होगी, सुबह उतनी ही करीब होगी। भगवान महावीर का निर्वाण हमारे जीवन में तभी फलीभूत होगा, जब हम उनके पथानुगामी बनेंगे और उनके संदेशों को आत्मसात करेंगे।
आज ही के दिन भगवान महावीर स्वामी ने 83 लाख 99 हजार 999 योनियों से मुक्ति प्राप्त की और जाते-जाते अमृत संदेश दे गए -जियो और जीने दो। इस एक वाक्य में सभी धर्मों का मार्ग समाहित हो गया। इसलिए हम सभी दिवाली पर किसी का बुरा नहीं करने का संकल्प लें और अपनी एक बुराई को त्यागें।
दिवाली पर हम विवेक बुद्धि से कार्य करें और और प्रेम, करुणा, सेवा, भाई चारे का अखंड दीप जलाएं। श्री 108 पीयूष सागर जी महाराज ससंघ बीसपंथी कोठी पारसनाथ में विराजमान हैं। यह जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा और मनीष सेठी ने दी।












