न्यूज सौजन्य – कुणाल जैन
प्रतापगढ़। आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि भगवान महावीर के शासन की विशेषता यही है कि हे आत्मन, सबको जान, पर सबको जानने के साथ ही स्वयं को भी जान। तू वास्तव में शांति चाहता है तो सारे प्रपंचों को छोड़कर अपनी आत्मा का ज्ञान लेने में लग जा। जिसने स्वयं के प्रपंचों में पड़कर आत्मा को निखारा है, वही शासन लायक बन सकता है। आचार्य नेमीचंद्र जी कहते हैं कि एकसमय के लिए किया गया गलत काम कई-कई दोष लगा देगा।
आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने आगे कहा कि जिस अचेतन के पीछे अपनी आत्मा को क्षलित करते हो, क्या वह अचेतन वस्तु आपको क्या सुफल देगी। आपको राग-द्वेषी की आवाज ही सुनाई देती है। आप जन्म-जन्म से आत्मा-परमात्मा के बारे में सुन रहे हैं, पर सच्चे अर्थ में सुनाई ही नहीं देता। राग-द्वेष की बात क्षण भर में सुनाई दे जाती है। क्या कभी भाव बने हैं कि मैं मेरी आत्मा का ध्यान करूं। इसके लिए प्रायस तो करना ही होगा। मैं जानता हूं, मानता हूं, इससे कुछ नहीं होने वाला है। बुखार की दवाई के बारे में जानते हैं, इससे बुखार ठीक नहीं होगा। बुखार ठीक करने के लिए दवाई तो खानी ही पड़ेगी।












