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आठ दिवसीय चारित्र शुद्धि विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ प्रारंभ : जैनेश्वरी दीक्षा में क्षुल्लक श्री नैगम सागर महाराज बने मुनि एवं क्षुल्लिका व्रत प्रभाजी बनीं आर्यिका


आचार्यश्री प्रसन्न सागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में हाउसिंग बोर्ड ग्राउंड, वीटी रोड पर चारित्र शुद्धि विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ 25 जनवरी प्रातः सकलीकरण क्रियाओं के साथ प्रारंभ हुआ। जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। जयपुर से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर…


जयपुर। आचार्यश्री प्रसन्न सागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में हाउसिंग बोर्ड ग्राउड, वीटी रोड पर चारित्र शुद्धि विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ 25 जनवरी प्रातः सकलीकरण क्रियाओं के साथ प्रारंभ हुआ। जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। इस मौके पर 2 जिनेश्वरी दीक्षाएं भी दी गई। जुलूस मुख्य संयोजक राकेश गोधा ने बताया कि शोभायात्रा में 12 तीर्थंकरों की प्रतिमाओं को बग्गियों में सवार होकर शामिल हुए। इसके बाद आचार्यश्री के सानिध्य में समाजसेवी अनिल मीना जैन परिवार ने झंडारोहण कर शुभारंभ किया। समाजसेवी ज्ञानचंद पंकज झांझरी ने विशाल मंडप का उदघाटन किया और आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया।

अणुव्रत का पालन करें, यही विश्व शांति की राह

महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि आचार्यश्री के सान्निध्य में बाल ब्र. तरुण भैया ने दीक्षा की क्रियाएं कराईं। आचार्यश्री ने क्षुल्लक श्री नैगम सागरजी महाराज एवं क्षुल्लिकाश्री व्रतप्रभा को क्रमशः मुनिश्री एवं आर्यिका श्री के रूप में दीक्षा प्रदान की।

आचार्यश्री ने कहा कि अपनी इंद्रियों को विजयकर आज मुनिश्री नैगम सागर एवं आर्यिका व्रत प्रभा ने अपने मानव जीवन को धन्य कर लिया है। मेरा यहां उपस्थित सभी श्रावक-श्राविकाओं से यही कहना है कि वे भगवान महावीर एवं भगवान पारसनाथ के बताए मार्ग पर चलकर अणुव्रत का पालन करें, यही विश्व शांति की राह है। दुनिया को आज इन्हीं सिद्धांतों की सबसे अधिक आवश्यकता है।

आनंद यात्रा, गुरु भक्ति एवं महाआरती होगी 

धर्मसभा को मुनि श्री सहजसागर जी महाराज ने अपने मंगल उद्वोधन में कहा कि जीवन में अपने दिन प्रतिदिन के पापों को नष्ट करने के लिए चारित्र शुद्धि विधान पूजा करनी चाहिए। उपाध्याय श्री पियूष सागरजी महाराज के मार्गदर्शन मांगलिक क्रियाएं प्रारंभ हुई। महोत्सव समिति के अध्यक्ष सुभाष जैन ने बताया कि 31 जनवरी तक किए जाने वाले इस अनुष्ठान में प्रतिदिन प्रातः 6.30 बजे से अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजा, चारित्र शुद्धि महामंडल विधान पूजा, धर्मसभा, मंगलाचरण, पाद पक्षालन सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रम होंगे। शाम को 6 बजे से आनंद यात्रा, गुरु भक्ति एवं महाआरती होगी।

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