गणाधिपति दिगंबर जैन गणधराचार्य 108 श्री कुन्थु सागर जी महाराज का 78वां अवतरण दिवस (जन्म जयंती समारोह) झीलों की नगरी उदयपुर में 1008 श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन चैत्यालय, महावीर भवन सेक्टर-14 में उनके परम प्रियाग्र शिष्य मुनि श्री श्रुतधर नंदी जी महाराज, मुनि श्री उत्कर्ष कीर्ति जी महाराज, क्षुल्लक श्री सुप्रभात सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य और निर्देश में आचार्य श्री की जीवनी एवं कृतत्व के गुणानुवाद, भक्ति भाव पूर्वक धर्म प्रभावना के साथ मनाया गया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट..
धरियावद/उदयपुर। परम पूज्य जगत गुरु भारत गौरव गणाधिपति दिगंबर जैन गणधराचार्य 108 श्री कुन्थु सागर जी महाराज का 78वां अवतरण दिवस (जन्म जयंती समारोह) झीलों की नगरी उदयपुर में 1008 श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन चैत्यालय, महावीर भवन सेक्टर-14 में उनके परम प्रियाग्र शिष्य मुनि श्री श्रुतधर नंदी जी महाराज, मुनि श्री उत्कर्ष कीर्ति जी महाराज, क्षुल्लक श्री सुप्रभात सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य और निर्देश में आचार्य श्री की जीवनी एवं कृतत्व के गुणानुवाद, भक्ति भाव पूर्वक धर्म प्रभावना के साथ मनाया गया।
मंगलाचरण से हुई शुरुआत
रविवार को प्रातः 1008 श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन चैत्यालय में मुनिश्री श्रुतधर नंदी जी महाराज ससंघ सान्निध्य में श्री जी का नित्य प्रति होने वाला जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य समर्पण, गुरु पाद प्रक्षालन आदि कार्यक्रम मंदिर में संपन्न हुए। इसके पश्चात महावीर स्वामी दिगंबर जैन चैत्यालय परिसर में सभा स्थल पर धर्मसभा का आयोजन हुए, जिसमें गणधराचार्य श्री कुन्थु सागर जी महाराज की बड़ी तस्वीर (चित्र) के सामने दीप प्रज्वलन पुण्यार्जक परिवार द्वारा किया गया और मंगलाचरण हुआ।
भक्तिभाव से चढ़ाया अर्घ्य
दिगंबर जैन समाज के अशोक कुमार जेतावत (धरियावद) ने बताया कि मुनि श्री श्रुतधर नंदी जी महाराज ससंघ सान्निध्य और निर्देशन में स्थानीय त्रिशला मंडल की महिलाओं, युवा मंडल के युवाओं और स्थानीय समाज व नगर के समाजजनों द्वारा आचार्य श्री के पूजन की स्थापना की गई। मुनि श्री श्रुतधर नंदी जी महाराज के मुखारविंद से संगीतमय धुन के साथ सुमधुर कंठ से मंत्रोच्चार पूर्वक अत्यंत भक्ति भाव पूर्वक गणाधिपति कुन्थु सागर जी महाराज की अष्ट द्रव्यों से भरे थालों को समर्पित (चढ़ाते) हुए पूजा की गई। पूजन के पश्चात भक्ति भाव पूर्वक नृत्य और गान करते हुए पूर्णार्घ्य चढ़ाया गया।
प्रवचन सभा के अंश
मुनि श्री श्रुतधर नंदी जी महाराज ने अपने दीक्षा गुरु गणधराचार्य श्री कुन्थु सागर जी महाराज के बारे में कहा कि राजस्थान राज्य के उदयपुर जिले के छोटे से गांव बाठरड़ा में से 77 वर्ष पूर्व कन्हैया लाल के नाम से छोटे से बालक ने जन्म लिया था, जो आज पूरे भारत और विश्व में जैन धर्म का डंका बजा रहे हैं। भारतवर्ष में जैन धर्म में दिगंबर जैन संत परंपरा में वर्तमान में सबसे ज्येष्ठ एवं श्रेष्ठ आचार्य गणाधिपति, गणधराचार्य कुन्थु सागर जी महाराज आज महाराष्ट्र राज्य में कुन्थुगिरी तीर्थ क्षेत्र में विराजमान हैं। आज आचार्य श्री से दीक्षित लगभग 350 पिच्छीधारी साधु संतों में से लगभग 60 संतों के सान्निध्य में अवतरण दिवस कुन्थुगिरी क्षेत्र पर मनाया जा रहा है। जैन धर्म में आर्ष परंपरा के कट्टर समर्थक आचार्य श्री ने पूरे भारतवर्ष में अभूतपूर्व धर्म प्रभावना की है। उनके आशीर्वाद से आधि, व्याधि, कष्ट अन्य बाधाएं शीघ्रता से दूर हो जाती हैं। साथ ही भक्तों की मनोकामनाएं भी फलीभूत होती हैं। मुनि श्री श्रुतधर नंदी जी ससंघ ने सिद्ध भक्ति, श्रुत भक्ति और आचार्य भक्ति पूर्वक गणधराचार्य के गुणों का गुणानुवाद किया। मुनि श्री ने यह भी कहा कि तीर्थंकरों का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाता है, साधु-संतों की जन्म जयंती मनाई जाती है और साधारण मनुष्य हैप्पी बर्थडे या जन्म दिवस मनाते हैं।
गुणानुवाद किया
धर्मसभा में सेठ शांतिलाल नागदा और सकल दिगंबर जैन समाज उदयपुर के अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत ने भी गुरु के गुणों का गुणानुवाद किया। सभा का संचालन भूरीलाल मुंडलिया ने किया। समारोह में पुण्यार्जक परिवारों ने बोली के माध्यम से राशि समर्पित कर भी धर्म लाभ लिया। इस मौके पर बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।













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