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621 तीर्थयात्रियों ने 11 तीर्थंकरों की जन्मभूमि को किया नमन : शांतिनाथ सेवा संघ की वार्षिक तीर्थयात्रा हुई संपन्न 


जैन धर्म के 11 तीर्थंकरों की जन्मभूमि की पावन रज को 621 यात्रियों के विशाल समूह ने अपने मस्तिष्क पर लगाकर अपनी मनुष्य पर्याय एवं जैन कुल में जन्म लेने को सार्थक किया। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुरैना। जैन धर्म के 11 तीर्थंकरों की जन्मभूमि की पावन रज को 621 यात्रियों के विशाल समूह ने अपने मस्तिष्क पर लगाकर अपनी मनुष्य पर्याय एवं जैन कुल में जन्म लेने को सार्थक किया। तीर्थ यात्रा समिति के मुख्य संयोजक गोकुलचंद जैन एवं श्री शांतिनाथ सेवा संघ शकरपुर दिल्ली के अध्यक्ष हरिश्चंद जैन ने बताया कि शकरपुर दिल्ली की सेवाभावी संस्था श्री शांतिनाथ सेवा संघ द्वारा तीन दिवसीय वार्षिक तीर्थ यात्रा 2025 के तहत 23 से 27 जनवरी तक अयोध्या-बनारस की तीर्थयात्रा का आयोजन किया। जिसमें मुरैना, अम्बाह, ग्वालियर, झांसी, नोएडा, दिल्ली, धौलपुर, आगरा, राजाखेड़ा, शमशाबाद, इलाहाबाद से 621 साधर्मी बंधु शामिल हुए। सम्पूर्ण यात्रा में सभी यात्रियों के लिए नाश्ता एवं भोजन की व्यवस्था पवन जैन, अक्षत जैन, मेघा जैन, दिविशा, जिनीश, विजयलक्ष्मी जैन नोएडा की ओर से की गई थी।

सूर्यकुंड पर लाइट एंड साउंड शो का आनंद लिया

यात्रा के प्रथम दिवस सभी यात्रियों ने शाश्वत तीर्थ अयोध्या जी में भगवान श्री ऋषभदेव स्वामी, अजितनाथजी, अभिनंदननाथजी, सुमतिनाथजी, अनंतनाथजी, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामजी की जन्मभूमि, गणिनी आर्यिका ज्ञानमति माताजी के दर्शन और वंदना कर यात्रा का शुभारंभ किया। कुछ यात्रियों ने सरयू घाट पर डुबकी लगाकर स्नान भी किया। रात्रि को सरयू घाट पर भव्य आरती एवं सूर्यकुंड पर लाइट एंड साउंड शो का आनंद लिया। द्वितीय दिन श्रावस्ती पहुंचकर भगवान संभवनाथ स्वामी की जन्मभूमि एवं रतनपुरी में भगवान धर्मनाथ स्वामी की पावन भूमि को नमन किया। श्रावस्ती में आयोजकों की ओर से सद्भावना संगोष्ठी भी की गई।

गंगा नदी के जैन घाट पर डुबकी भी लगाई

तीसरे दिन वाराणसी पहुंचकर भगवान सुपार्श्वनाथ, चंद्रप्रभु, श्रेयांसनाथ, पार्श्वनाथ स्वामी की जन्मभूमि की वंदना कर अपने मानव जीवन को धन्य किया। गंगा नदी के जैन घाट पर डुबकी भी लगाई। साथ ही गंगा आरती एवं काशी विश्वनाथ मंदिर का अवलोकन भी किया। श्री दिगम्बर जैन मंदिर भेलूपुर वाराणसी में संस्था के अध्यक्ष हरिश्चंद जैन के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में विधान किया गया। मंदिरजी में विराजमान मुनिश्री समतासागर, मुनिश्री पवित्रसागर, मुनिश्री पूज्यसागर, मुनिश्री अतुलसागर, आर्यिका गुरुमति, दृढमति, गुणमति माताजी सहित विशाल संघ के दर्शन कर आहारचर्या में सहभागिता प्रदान की।

पवित्र भावना के फलस्वरूप ही यह यात्रा सानंद हो सकी

621 यात्रियों की सभी व्यवस्थाएं परिवहन पूर्ण रूप से चाकचौबंद थीं। इतने बड़े विशाल यात्रा संघ को संभालना कोई सहज कार्य नहीं था। हम लोग कभी किसी के भी कार्य में निकाल सकते हैं, लेकिन कार्य को सुचारू रूप में संपन्न कराना विरले ही व्यक्ति जानते हैं। सेवा संघ एवं आयोजन समिति के सभी कार्यकर्ता बधाई के पात्र हैं, जिनकी कड़ी मेहनत, लगन एवं समाजसेवा की पवित्र भावना के फलस्वरूप ही यह यात्रा सानंद हो सकी। आयोजन समिति ने सभी यात्रियों को यथासमय चाय, नाश्ता, भोजन, फलाहार की व्यवस्था, परिवहन के लिए 12 बड़ी बसों सहित अन्य छोटे वाहनों और आवास के लिए सर्व सुविधायुक्त कमरे आदि की व्यवस्थाकर सभी यात्रियों का मन मोह लिया। सभी यात्रियों ने श्री शांतिनाथ सेवा संघ के समस्त बंधुओं की प्रशंसा की और सफल यात्रा के लिए बधाई दीं।

यात्रियों के सहयोग से सफल रही यात्रा 

श्री शांतिनाथ सेवा संघ के महामंत्री दिनेश जैन टीटू, कोषाध्यक्ष अजय जैन अजिया, यात्रा प्रभारी दीपक जैन ने बताया कि समाज के श्रावक श्रेष्ठियों के सहयोग से इस यात्रा में त्रुटियां होना स्वाभाविक है। यदि किसी भी यात्री को कोई असुविधा या परेशानी हुई हो तो हम अपनी संस्था और पूरी टीम की ओर से उनसे क्षमायाचना करते हैं। सभी यात्रियों ने भरपूर सहयोग प्रदान किया, यही कारण था कि यात्रा पूर्ण रूप से सफल रही।

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