नेमीनगर जैन कॉलोनी के नेमीनाथ जिनालय का 55वां स्थापना दिवस परम पूज्य आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज की सुशिष्या आर्यिका 105 श्री सुनयमति माताजी के सानिध्य में अत्यंत भक्ति भाव, उत्साह व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर शांति धारा का पुण्यार्जन मंदिर निर्माण करने वाले पवन काला व शांतिलाल काला बड़ोदिया वाले परिवार को प्राप्त हुआ। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। नेमीनगर जैन कॉलोनी के नेमीनाथ जिनालय का 55वां स्थापना दिवस परम पूज्य आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज की सुशिष्या आर्यिका 105 श्री सुनयमति माताजी के सानिध्य में अत्यंत भक्ति भाव, उत्साह व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर शांति धारा का पुण्यार्जन मंदिर निर्माण करने वाले पवन काला व शांतिलाल काला बड़ोदिया वाले परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर श्री नेमीनाथ विधान का आयोजन समस्त कॉलोनी वासियों के द्वारा किया गया। आर्यिका 105 सुनयमति माताजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह अत्यंत खुशी का दिवस है, इस दिन इस जिनालय की स्थापना हुई थी।
जिनबिम्ब सम्यक दर्शन प्रकट करने का साधन है। इनके दर्शन से मोक्ष मार्ग की प्रथम सीढ़ी प्रशस्त होती है। परंतु यह चिंता भी व्यक्त की कि हम मंदिर तो बना देते हैं परंतु पूजा पाठ करने, गुरुओं को आहार दान देने तथा उनके विहार आदि की व्यवस्था में हम कमजोर हैं। आज हमारे बच्चे विदेश में जा रहे हैं तो इन जिनालयों में पूजा पाठ कौन करेगा? आज से 40 50 वर्ष बाद कौन आएगा? हमारी जिम्मेदारी है कि हम इन जिनालयों के रखरखाव के लिए हमारे बच्चों को यहां ही आज के भौतिकता वादी युग में धर्म और धन में हमें धर्म को चुनना होगा तभी यह जिनायतन सुरक्षित रह पाएंगे और हमारा स्थापना दिवस मनाना सार्थक होगा।
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इस अवसर पर समाज अध्यक्ष कैलाश लुहाड़िया तथा मंत्री गिरीश पटौदी, पवन गुना वाले, प्रवीण पाटनी, दिलीप बाकलीवाल, नरेंद्र जैन, प्रतिभा अजमेरा, किरण बड़जात्या, कौशल्या पतंगिया, कल्पना बकलीवाल, मधु जैन, शशि जैन, सेना गंगवाल, कुसुम गंगवाल, ममता बज, गिरीश काला, जयेश, निलेश, निर्मला जैन हातोद वाले, प्रमोदिनी जैन, उषा काला आदि समाज जन उपस्थित थे। विधान की समस्त मांगलिक क्रियाएं किरण बड़जात्या ने करवाईं। संचालन गिरीश पाटोदी ने किया। प्रारंभ में दीप प्रज्वलन तथा माता जी का पाद प्रक्षालन महिला संघठन द्वारा किया गया। शास्त्र भेंट कौशल्या पतंगिया, स्मिता गंगवाल और अन्य ने किया। कैलाश लुहाड़िया मंदिर की स्थापना के बारे में विस्तार से बताया।













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