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आर्यिका विशुद्ध मति माताजी का 23वां समाधि दिवस मनाया : मुनि पुण्य सागर जी महाराज ने अर्पित की विनयांजलि


श्री दिगंबर जैन महावीर स्वामी मंदिर में आर्यिका रत्न विशुद्धमति माताजी के 23वें पुण्य समाधि दिवस पर विनयांजलि सभा हुई। मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज और मुनिश्री महिमा सागर जी महाराज के ससंघ सान्निध्य में धर्मसभा में माताजी को श्रद्धा भक्ति के साथ विनयांजलि अर्पित की गई। पढ़िए धरियावद से अशोक  कुमार जेतावत की यह खबर…


धरियावद। श्री दिगंबर जैन महावीर स्वामी मंदिर में आर्यिका रत्न विशुद्धमति माताजी के 23वें पुण्य समाधि दिवस पर विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज एवं मुनिश्री महिमा सागर जी महाराज के ससंघ सान्निध्य में धर्मसभा में समाधिस्थ पूज्य माताजी को श्रद्धाभक्ति के साथ विनयांजलि अर्पित की गई। मुनिश्री पुण्य सागर जी महाराज ने आर्यिका विशुद्धमति माताजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए श्रावकों को गुरुओं के बताए हुए मार्ग पर चलने एवं आत्मकल्याण करने की सीख दी।

कार्यक्रम में मंदिरजी में 25 जोड़ों ने माताजी की अष्ट द्रव्यों से भरे थालों से पूजा की। समारोह में सौधर्म इंद्र-इंद्राणी का लाभ प्रतापगढ़ के उप जिला प्रमुख सागरमल बोहरा परिवार ने लिया। बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी, ब्रह्मचारी विकास भैया, ब्रह्मचारिणी मुन्नी बाई, प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन ने भी आर्यिका विशुद्ध मति माताजी को विनयांजलि दी। कार्यक्रम का संचालन पंडित भागचंद जैन ने किया।

22 वर्ष पहले हुआ था समाधिमरण

अशोक कुमार जेतावत ने बताया कि 20वीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य 108 श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के आचार्य श्री शिव सागर जी महाराज की शिष्या और वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की संघस्थ आर्यिका विदुषी आर्यिका 105 श्री विशुद्धमति माताजी (सतना) का 22 वर्ष पहले नंदनवन (धरियावद) में सम्यक समाधिमरण हो गया था। इस क्षेत्र में इस युग की वे पहली आर्यिका माताजी थीं। जिनके 12 वर्षीय नियम संल्लेखना और 5 दिन यम संल्लेखना के बाद उनका सम्यक समाधिमरण हुआ था। इसी दिन 21 जनवरी 2002 को आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के शिष्य एवं संघस्थ मुनिराज 108 श्री चारित्र सागर जी महाराज की समाधि सनावद (मप्र) में हो गई थी।

यह हुए कार्यक्रम

परम पूज्या क्षपकोत्तमा विदुषी आर्यिका रत्न 105 श्री विशुद्ध मति माताजी के 23 वें अंतर विलय दिवस के अवसर पर हुए कार्यक्रम में मंगलवार को तड़के 3:30 बजे नंदन वन में गुलाब जल से समाधी स्थल की शुद्धि, पुष्प मंडप रचना, सुबह 4:29 बजे दीप ज्योत्सना, अर्घावतरण, विन्याजलि स्तुति, शांति भक्ति के कार्यक्रम हुए। बुधवार को सुबह 9 बजे मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज के सान्निध्य में संहिता सूरी प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जैन के मार्गदर्शन में महावीर दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

मुनिश्री ने किया विहार

मुनि महिमा सागर जी महाराज का मंगल विहार

दिगंबर जैनाचार्य 108 श्री वरदत्त सागर जी महाराज के शिष्य मुनि 108 श्री महिमा सागर जी महाराज ससंघ 6 पिच्छी का बुधवार दोपहर 3 बजे बाद धरियावद से प्रतापगढ़ की ओर मंगल विहार हुआ। मुनिश्री का विहार इंदौर (मध्य प्रदेश) की ओर चल रहा है। संघ का रात्रि विश्राम धरियावद के पास जेलदा ग्राम में होकर गुरुवार सुबह की आहार चर्या चिकलाड़ गांव में होगी। गुरुवार का रात्रि विश्राम देवगढ़ में होने की संभावना है।

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