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16 भाषाओं के ज्ञाता मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज के आशीर्वचन से जैन संगोष्ठी का समापन


  • श्रमण और श्रावक दोनों एक दूसरे के लिए महत्वपूर्णः मुनि श्री आदित्य सागर जी

  • जैन दर्शन और जैनाचार दोनों ही पूर्णरूपेण वैज्ञानिकः डॉ. अनुपम जैन
  • श्रमणाचार श्रावकाचार पर तीन दिवसीय संगोष्ठी सम्पन्न

न्यूज़ सौजन्य -राजेश दद्दू

इंदौर। समोसरण मंदिर, कंचन बाग में श्रमणाचार श्रावकाचार विषय पर 13 से 15 अगस्त तक आयोजित तीन दिवसीय जैन विद्वत संगोष्ठी के अंतिम दिवस की गोष्ठी का शुभारंभ भारतवर्षीय दिगंबर जैन विद्वत परिषद के अध्यक्ष डॉक्टर श्रेयांश जैन बडोत ने 15 अगस्त को ध्वजारोहण कर किया। संगोष्ठी का समापन 16 भाषाओं के ज्ञाता मुनि श्री आदित्यसागरजी महाराज के आशीर्वचन से हुआ।
संगोष्ठी के अंतिम सत्र में सर्वप्रथम जैन गणित के अंतर्राष्ट्रीय विद्वान डॉ. अनुपम जैन ने जैनाचार की वैज्ञानिकता और विश्व शांति की भूमिका विषय पर अपना आलेख वाचन करते हुए कहा कि जैन दर्शन और जैनाचार दोनों ही पूर्णरूपेण वैज्ञानिक हैं। विश्व की समस्त समस्याओं के समाधान, विश्व में शांति, समाज के विकास और परिवार में स्थिरता के लिए जैनाचार (जैन जीवन शैली) सार्थक, उपयोगी और महत्वपूर्ण है। संगोष्ठी के इस सत्र में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के गृहस्थ जीवन की बहन ब्रह्मचारिणी स्वर्णा दीदी, डॉक्टर श्रेयांश जैन बडोत, पंडित रमेश चंद बांझल, पंडित विनोद जैन रजवास, डॉ भरत शास्त्री एवं डॉ ज्योति जैन खतौली ने अपने आलेखों का वाचन किया।
मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने अपने समापन संबोधन एवं आशीर्वचन में कहा कि संगोष्ठी में श्रमणों की चर्या, आहार चर्या, शिथिलाचार श्रावकाचार एवं श्रावकों के कर्तव्य और अधिकारों आदि विषयों पर विद्वानों ने अपने आलेख वाचन में विस्तार से प्रकाश डाला है। साथ महत्वपूर्ण सुझाव एवं समाधान प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने कहा कि श्रमण और श्रावक दोनों एक दूसरे के लिए महत्वपूर्ण हैं। श्रमणों की चर्या, साधना चातुर्मास आदि निर्विघ्न कराने में श्रावकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। श्रमणों का भी कर्तव्य है कि श्रमण अपनी चर्या एवं प्रवचन के माध्यम से धर्म, अध्यात्म, सद्भाव और संस्कारों की सुरभि फैलाएं। दोनों सत्रों की गोष्ठी का संचालन क्रमशः डॉक्टर बाहुबली जैन एवं डॉक्टर भरत शास्त्री ने किया।

इस अवसर पर चातुर्मास एवं आयोजन समिति प्रमुख श्री आजाद जैन, अशोक खासगीवाला, टी के वेद, हंसमुख गांधी ने विद्वानों का सम्मान किया। गोष्ठी के संयोजक पंडित विनोद कुमार जैन रजवास ने आभार जताया। गोष्ठी में डॉक्टर जैनेंद्र जैन, पंडित रतन लाल शास्त्री, निर्मल गंगवाल, शांतिलाल बड़जात्या, अरुण सेठी आदि समाज श्रेष्ठी उपस्थित थे।

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