प्राचीन पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में वसंत पंचमी पर स्थापना दिवस मनाया गया। इस मंदिर की स्थापना हुई थी। यह 400 साल पुराना मंदिर है। भगवान पार्श्वनाथ का 23 दृव्यों से अभिषेक किया गया। सजावट कर दीपोत्सव मनाया गया। पढ़िए पारसोला से राजेश पंचोलिया की यह खबर…
पारसोला। पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित सन्मति नगर में विराजित हैं। जयंतीलाल कोठारी अध्यक्ष दशा हूमड दिगंबर जैन समाज ने बताया कि नगर के प्राचीन श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर की 400 वर्ष पूर्व माध सुदी पंचमी वसंत पंचमी के दिन स्थापना हुई थी। स्थानीय दिगंबर जैन समाज ने मंदिर के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ के सानिध्य में श्री पार्श्वनाथ भगवान का 23 द्रव्यों से भव्य पंचामृत अभिषेक किया।
इन दृव्यों से किया अभिषेक
सौभाग्यशाली परिवारों ने विशेष द्रव्यों जल, दूध, दही, केशर, सर्वाेषधी, सेवफल, अनार,केले, चीकू, नारियल पानी, धी, मौसबी, पपीता, नारंगी, अमरूद, अंगूर, सहित विभिन्न मौसमी फलों, सूखे मेवे बादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता,आदि के रसों, चंदन, चार कलशों, सुगंधित जल पुष्पों की वृष्टि शांतिधारा की।
मुनिश्री हितेंद्रसागर जी ने करवाई शांतिधारा
मुनिश्री हितेंद्र सागर जी द्वारा उच्चारित मंत्रोच्चार से सुगंधित जल से अभिषेक कुलदीप,पंडित कीर्तिश, श्रेणिक तथा वृहद शांतिधारा करने का सौभाग्य महावीर वगैरिया परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर सभी मंदिरों में सुंदर मन मोहक फूलों से सजावट कर प्रकाश से दीपोत्सव मनाया गया।
श्री शांतिसागर जी ने बताया था मंदिर को अतिशयकारी
पंडित कीर्तिश, राजेश पंचोलिया ने बताया कि उल्लेखनीय है कि प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी प्रतापगढ़ चातुर्मास के समय पारसोला आए थे। तब दो दिनों के प्रवास में इस प्राचीन श्री पार्श्वनाथ भगवान को अतिशयकारी बताया था। सन 1990 में खाड़ी युद्ध में नगर के भक्तों के कुवैत में प्राण संकट में थे। तब इस मंदिर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी और मुनि श्री वीरसागर की के आशीर्वाद तथा प्रेरणा से विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। सभी भक्त सुरक्षित वापस आए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सन्मति नगर विराजित हैं। आचार्य संघ सानिध्य में धार्मिक मंडल विधान हो रहे हैं। वसंत पंचमी पर चौंसठ रिद्धि विधान की पूजा हुई। जिसमें मंत्रोच्चार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने किए।













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