तीर्थंकर बालक जन्म से मति, श्रुत और अवधि ज्ञान के धारी होते हैं : भगवान का जन्म कल्याणक श्रद्धा, भक्ति उत्साह से मनाया गया
संसार समुद्र में दुःख से डूबे हैं, संसार में सुख नहीं है, सुख शाश्वत होना चाहिए और शाश्वत सुख धर्म से मिलता है और धर्म से पुण्य कमाया जाता है और पुण्य से ही सुख के राह मिलती है। यह उद्गार आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने व्यक्त किए। पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर...
इंदौर • Shree Phal News • 19/2/2026, 10:41:34 pm




















