जिससे राग, उसके अवगुण और जिससे द्वेष उसके गुण नहीं दिखते'
मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज के श्रुत आराधना वर्षा योग के दौरान प्रवचन न्यूज सौजन्य-राजेश जैन दद्दू इंदौर। ' राग-द्वेष, मोह की संतान हैं। एक मीठा जहर एक कड़वा जहर है। राग, द्वेष, क्रोध, मान, माया, लोभ, नौ कर्म, मन, वचन, काय और पांच इंद्रियां यह मोह की सेना हैं। जिसने इन सैनिको
इंदौर • Shreephal Jain News • 29-07-2022, 02:53 am





















