व्यवहार चारित्र को धारण करें- आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी
संवाददाताShreephal Jain Newsइंदौर
आचार्यजी का संघ के चेत्यालय में हुआ पंचामृत अभिषेकन्यूज सौजन्य- राजेश पंचोलियाश्रीमहावीरजी। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने अपने उद्बोधन में कहा है कि सम्यक्त्व होने पर ज्ञान व वैराग्य की शक्ति अवश्य प्रगट हो जाती है। जो समिति से रहित हैं, उन्हें ही संसार में बार-बार जन्म लेना पड़ता है। जो समितियों का पालन कर रहे हैं, समझिए उन्हें जल्द ही मुक्ति रूपी लक्ष्मी प्राप्त होने वाली है। व्यवहार समिति के बिना निश्चय समिति नहीं हो सकती और निश्चय समिति के बिना मोक्ष नहीं हो सकता। अत: व्यवहार चारित्र को धारण करके निश्चय चारित्र को प्राप्त करने का उद्यम करना चाहिए। वर्द्धमान सागर जी ने श्रीमहावीरजी में नियम सार के स्वाध्याय में समितियों के विवेचन में उक्त विचार प्रगट किए।
राजस्थान के प्रसिद्ध अतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी में विराजित प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्ति सागर जी महाराज की परम्परा के पंचम पट्टाचार्य परम पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज का सोमवार को प्रात:कालीन वन्दना उपरांत संघ के चेत्यालय में पंचामृत अभिषेक हुआ। तत्पश्चात श्री मद कुंदकुंद आचार्य देव प्रणीत नियम सार ग्रंथराज का सामूहिक स्वाध्याय वाचन हुआ।
राजेश पंचोलिया ने बताया कि दोपहर में भी सामूहिक स्वाध्याय सभा हुई। आचार्य संघ अभी संग्रहालय के ऊपर परिसर में विराजमान हैं। शाम को यहीं पर आरती, गुरु वंदना नियमित रूप से होती है।
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इंदौर • Shreephal Jain News • 07-10-2026, 10:40 am