सहा नहीं गया गुरु का वियोग, रो पड़ा शिष्यों का हृदय : श्रमण संस्कृति में गुरुवर विरागसागर जी की आदर्श समाधि -आचार्य विमर्शसागर
देशभर में विराजमान महा संत के 500 शिष्याओं ने अपने गुरुदेव के चरणों में विनयांजलि द्वारा अपने भाव सुमन अर्पित किए गर्णाचार्य श्री के सुयोग शिष्यों में भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज " जीवन है पानी की बूंद" महाकाव्य के मूल रचिता के रूप में विख्यात हैं पढ़िए मनो
इंदौर • Shreephal Jain News • 06-07-2024, 03:23 am



















