दसलक्षण पर्व पर त्याग और दान का गूढ़ महत्व समझाया : मन के विकारों का शमन ही है उत्तम त्याग – मुनिश्री विलोक सागर
मुरैना में दसलक्षण पर्व के आठवें दिन बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोक सागर जी और मुनिश्री विबोध सागर जी ने कहा कि उत्तम त्याग का अर्थ केवल वस्तुओं का त्याग नहीं, बल्कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकारों का शमन करना है। उन्होंने त्याग और दान के अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि
मुरैना • Shreephal Jain News • 05-09-2025, 01:25 am




















