महरौनी में दशलक्षण पर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म पर मुनिश्री गुरूदत्त सागर और मुनिश्री मेघदत्त सागर जी महाराज के प्रवचन हुए। इस अवसर पर रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
महरौनी में दिगंबर जैन समाज द्वारा दशलक्षण पर्व के आठवें दिन विशेष धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुनिश्री गुरूदत्त सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि “व्यक्ति जब अपने अहंकार, लालच और लालसा से मुक्त होता है, तभी वह सच्चा आत्मिक आनंद अनुभव करता है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि त्याग केवल सांसारिक वस्तुओं का परित्याग नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म से मोह और आसक्ति का त्याग करना भी आवश्यक है।
मुनिश्री मेघदत्त सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि उत्तम त्याग धर्म का अभ्यास जीवन से अनावश्यक इच्छाओं को कम करता है और यही मोक्ष प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग है। त्याग के माध्यम से व्यक्ति न केवल स्वयं शुद्ध होता है, बल्कि समाज में सद्भाव, करुणा और संतुलन की स्थापना करता है।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रंगोली प्रतियोगिता रही, जिसमें श्रीमती रश्मि मलैया के निर्देशन में बच्चों और युवाओं ने संयम, सेवा और आध्यात्मिकता पर सुंदर प्रस्तुतियां दीं। मुनि महाराजों ने प्रतिभागियों को आशीर्वाद दिया और कहा कि रंगोली केवल सजावट नहीं, बल्कि धैर्य और रचनात्मकता का प्रतीक है।
अंत में प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। उपस्थित समाजजनों ने प्रवचन और प्रतियोगिता की सफलता की सराहना की और इसे दशलक्षण पर्व का प्रेरणादायी क्षण बताया।





