जैन धर्म समाज, साहित्य और संस्कृति में अतुलनीय योगदान : जैन समाज में शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी सी चमक रही हैं ज्ञानमति माताजी
सन् 1934 की शरद पूर्णिमा के शुभ दिन जब चन्द्रमा की शुभ्र छटा सम्पूर्ण धरा को अपने आवेश में समेटे थे, तब उ.प्र. के बाराबंकी जनपद के ग्राम टिकेतनगर में बाबू छोटेलाल जी जैन के घर एक कन्या का जन्म हुआ। यही कन्या आगे चलकर जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी ज्ञानमति माताजी बनीं। पहले मात्र 18
इंदौर • संपादक • 27/10/2023, 10:06:49 pm























