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समसामयिक एवं धार्मिक विषयों पर विशेष आलेख

दसलक्षण पर्व पर आज जानिए उत्तम आकिंचन्य धर्म के बारे में : आत्‍मा का ध्‍यान करना ही आकिंचन्‍य धर्म- मुनि पूज्य सागर महाराज

उत्तम आकिंचनता धर्म का अभ्यास व्यक्ति को आत्मिक संतुलन, शांति और जीवन की गहरी समझ की ओर ले जाता है। यह भौतिकता के पार जाकर एक अधिक स्थायी और आंतरिक सुकून की खोज करने की प्रेरणा देता है। पढ़िए मुनि श्री पूज्य सागर महाराज का विशेष आलेख... दसलक्षण धर्म का नवां कदम है आकिंचन्य धर्म।

इंदौर Shreephal Jain News 16-09-2024, 02:36 pm

पर्यूषण पर्व , 15 सितम्बर, आठवां दिन, उत्तम त्याग धर्म पर विशेष : सुपात्र को दें दान, त्यागें बुरी आदत, समय का दान करना भी जरूरी

दसलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की आराधना की जाती है। जो मनुष्य सम्पूर्ण पर द्रव्यों से मोह छोड़कर संसार , देह और भोगों से उदासीन रूप परिणाम रखता है उसके उत्तम त्याग धर्म होता है । सच्चा त्याग तब होता है जब मनुष्य पर द्रव्यों के प्रति होने वाले मोह , राग ,द्वेष को छ

इंदौर Shreephal Jain News 15-09-2024, 12:12 am

ऐसे करें उपवास की पारणा : सुरक्षित और प्रभावी तरीके से करें उपवास की पारणा, अन्यथा नहीं मिलेगा पूरा फल

दसलक्षण पर्व के दौरान बहुत से श्रावक-श्रावक व्रत या उपवास करते हैं। ऐसे में उपवास की पारणा सही विधि-विधान से करनी आवश्यक है। किसी व्रत या उपवास के दूसरे दिन किया जाने वाला पहला भोजन और तत्संबंधी कृत्य पारणा कहलाता है। व्रत के दूसरे दिन ठीक रीति से पारणा न करें तो पूरा फल नहीं मिल

इंदौर Shreephal Jain News 13-09-2024, 07:22 pm

उत्तम संयम धर्म पर विशेष आलेख: अपनी आत्मा को जानना और किसी गलत कार्य मे नहीं जाने देना उस पर नियंत्रण रखना उत्तम संयम धर्म

प्राणी संयम और इन्द्रिय संयम जीवन मैं अगर कर्मो की लगाम लगानी है तो संयम तो अपनाना ही पड़ेगा। प्राणी संयम सभी जीवो पर दया षट काय जीव की रक्षा करना। इन्द्रिय संयम पंच इन्द्रिय जीव और मन को वश मे करना। संयम क्या है अपनी आत्मा को जानना और किसी गलत कार्य मे नहीं जाने देना उस पर नियंत्

इंदौर Shreephal Jain News 13-09-2024, 04:23 pm

दसलक्षण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म के बारे में जानें : वाणी का करें सदुपयोग ,अप्रिय, कटु, कठोर, शब्द नहीं बोलें

आज उत्तम सत्य धर्म का दिन है। जहां क्षमा , मार्दव , आर्जव , शौच आत्मा का स्वभाव है , वहीं सत्य- संयम- तप त्याग इन गुणों को प्रगट करने के उपाय हैं , या कहें कि ये वो साधन हैं जिनसे हम आत्मिक गुणों की अनुभूति और प्रकट कर सकते हैं। जैसा देखा या सुना हो, उसे वैसा नहीं कहना बताना ही झ

इंदौर Shreephal Jain News 12-09-2024, 12:30 pm

कहानी उत्तम सत्य धर्म की : हमेशा सत्य का आदर करें

सत्य को अपनाने से व्यक्ति खुद की वास्तविकता और आत्मा की गहराई को समझ सकता है। यह आत्म-साक्षात्कार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होता है। सत्य को जानने और स्वीकार करने से व्यक्ति अपने अस्तित्व और जीवन के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से देख सकता है। आज पढ़िए कहानी उत्तम सत्य धर्म की.. एक

इंदौर Shreephal Jain News 12-09-2024, 11:30 am

दसलक्षण पर्व पर आज जानिए उत्तम सत्य धर्म के बारे में : स्वयं की पहचान ही वास्तव में उत्तम सत्य धर्म है-मुनि पूज्य सागर महाराज

जैन धर्म में सत्य को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे सच्चाई और ईमानदारी के रूप में देखा जाता है। जैन ग्रंथों में सत्य को "सच्चा", "निष्कलंक" और "अखंड" कहा गया है। सच्चे और ईमानदार विचार और कर्म की ओर प्रवृत्त होना व्यक्ति के आत्मा की उन्नति के लिए आवश्यक माना जाता है। पढ़िए अंतर्

इंदौर Shreephal Jain News 12-09-2024, 10:30 am

जानिए विभिन्न राज्यों में होने वाली विशेष आराधना के बारे में : भाद्रपद मास में आने वाले दसलक्षण पर्व का होता है विशेष महत्व

दसलक्षण पर्व दिगंबर जैन परंपरा में प्रमुखता से मनाया जाता है। यह दस दिनों का एक विशेष धार्मिक उत्सव है। यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी से शुरू होकर चतुर्दशी तक चलता है। इस पर्व का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति करना है। पढ़िए श्रीफल जैन न्यूज की संपादक

इंदौर Shreephal Jain News 08-09-2024, 02:30 pm

चारूकीर्ति स्वामी की 75वीं जन्मजयंती के उपलक्ष्य में विशेष श्रृंखला-3 : श्रमण संस्कृति के प्रहरी थी चारूकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी- मुनि श्री सुधासागरजी महाराज

श्रवणबेलगोला के समाधिस्थ बड़े स्वामी जी चारूकीर्ति भट्टारक जी को सामाजिक और धार्मिक योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने समाज में नैतिकता, आध्यात्मिकता और अहिंसा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अपने जीवन को जैन धर्म के सिद्धांतों के पालन और शिक्षा में सम

श्रवणबेलगोला Shreephal Jain News 06-09-2024, 08:26 pm

चारूकीर्ति स्वामी की 75वीं जन्मजयंती के उपलक्ष्य में विशेष श्रृंखला-2 : चारुकीर्ति जी के व्यक्तित्व का सबसे बड़ा अलंकरण 'अजातशत्रुता' -आचार्य श्री सुविधिसागर महाराज

श्रवणबेलगोला के समाधिस्थ बड़े स्वामी जी चारूकीर्ति भट्टारक जी को सामाजिक और धार्मिक योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने समाज में नैतिकता, आध्यात्मिकता और अहिंसा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अपने जीवन को जैन धर्म के सिद्धांतों के पालन और शिक्षा में सम

श्रवणबेलगोला Shreephal Jain News 05-09-2024, 06:41 pm

चारूकीर्ति स्वामी की 75वीं जन्मजयंती के उपलक्ष्य में विशेष श्रृंखला-1 : चारूकीर्ति स्वामी जी ने बहुत पहले से अपनी साधना को शुरू कर रखा था - आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज

श्रवणबेलगोला के समाधिस्थ बड़े स्वामी जी चारूकीर्ति भट्टारक जी को सामाजिक और धार्मिक योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने समाज में नैतिकता, आध्यात्मिकता और अहिंसा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अपने जीवन को जैन धर्म के सिद्धांतों के पालन और शिक्षा में सम

श्रवणबेलगोला Shreephal Jain News 04-09-2024, 07:16 pm

चीरहरण का जिम्मेदार कौन ? : महिलाओं के प्रति सोच को बदलने के लिए सार्थक सामूहिक प्रयास करने होंगे

महिला पर जब भी विपत्ति आती है तो यही होता है, संस्कारों को बेड़ियां कहकर अथवा सशक्तीकरण की दुहाई देकर अथवा अपराधी और उसके साथियों को आचरण व्यवहार को परिभाषित करने में व्यर्थ का समय खर्च किया जाता है। पुरुष प्रधान समाज, महिला जागृति अभियान, महिला सशक्तीकरण इन विषयों पर चर्चा करने

इंदौर Shreephal Jain News 02-09-2024, 11:30 am

पर्युषण महापर्व एक सितम्बर से प्रारम्भ : आत्मा की शुद्धि के लिए करेंगे तप व जप

जैन धर्म के पर्युषण पर्व मनुष्य को उत्तम गुण अपनाने की प्रेरणा हैं। इन दिनों जैन धर्मावलंबी व्रत, तप, साधना कर आत्मा की शुद्धि का प्रयास करते हैं और स्वयं के पापों की आलोचन करते हुए भविष्य में उनसे बचने की प्रतिज्ञा करते हैं। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य आत्मा को शुद्ध बनाने के लिए

इंदौर Shreephal Jain News 29-08-2024, 07:51 pm

जैन धर्म के अनुसार रक्षाबंधन क्यों? : रक्षा बंधन को सच्चे अर्थों में मनाना है तो बाहर और भीतर से एक समान हों

प्रतिवर्ष श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को रक्षाबंधन अत्यंत प्राचीन पर्व है। इसकी परम्परा अठारहवें तीर्थंकर अरहनाथ के तीर्थ से महामुनि विष्णुकुमार के निमित्त से प्रारंभ हुई है। रक्षा बंधन पर हममें जो करूणाभाव है वह तन-मन धन से अभिव्यक्त हो। यह एक दिन के लिए नहीं, सदैव के लिए हमारा स्वभाव

इंदौर Shreephal Jain News 19-08-2024, 03:46 am

साधना और सेवा का पर्व चातुर्मास 20 जुलाई से शुरू : 10 किलोमीटर के दायरे से बाहर नहीं जा सकेंगे

जैन समाज में चातुर्मास 20 जुलाई से प्रारंभ होगा। इस दौरान जैन साधु-साध्वी चार माह तक एक ही स्थान पर निवास कर आत्मसाधना करेंगे और करवाएंगे। प्रवचनों और त्याग-तपस्याओं का वातावरण बनेगा। जैन संतों के लिए यह आगमिक विधान है कि वे चातुर्मास काल में चार कोस अर्थात् शहर के प्राचीन चुंगी

इंदौर Shreephal Jain News 19-07-2024, 05:24 pm

आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव में होंगे कई कार्यक्रम : आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का 152वां वर्ष वर्धन 27 जून को

प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती गुरुणाम गुरु आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का 152वां वर्ष वर्धन "दिवस आषाढ़ कृष्णा छठ 6 दिनांक अनुसार 27 जून 2024 को है। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद वर्ष 1924 में हुआ वर्ष 2024 में आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव आचार्य श्री वर्धमा

इंदौर Shreephal Jain News 27-06-2024, 05:23 pm

जैन तीर्थंकर प्रतिमा पद्मासन में होती है ध्यान अवस्था की मुद्रा में : जैन ऋषि-मुनियों की दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है ध्यान योग

एक समय था जब भारत भारतीयों की जीवन शैली का अभिन्न अंग हुआ करता था ध्यान योग परंतु समय बदला, परंपराएं बदलीं, जीवन शैली बदली और आधुनिकता की चकाचौंध में भारतीय अपनी मूल संस्कृति को भूलता गया। उस भूली हुई परम्परा को सहेजने और दुनियाभर में प्रचारित करने का उपक्रम कुछ महापुरुषों ने किय

इंदौर Shreephal Jain News 20-06-2024, 09:57 pm

धार्मिक आयोजनों में बढ़ता बोतल बंद पानी का चलन : पानी छानकर पीने की जैन समाज की आदर्श परंपरा पर हो रहा कुठाराघात

जैन धर्म के अनुसार पानी छानने की जो भावना है वह जीव-दया की भावना है। जैन धर्म के अनुसार जल में त्रस जीव भी होते हैं। विज्ञान के अनुसार एक बूंद पानी में 36450 जीव होते हैं, त्रस जीवों की संख्या तो बहुत ज्यादा है। आज ज्यादातर हमारे धार्मिक आयोजनों में भी बिना छने पानी का धड़ल्ले से

इंदौर Shreephal Jain News 13-06-2024, 09:16 pm

श्रुत पंचमी का आध्यात्मिक-धार्मिक महत्व : जिनवाणी माता पहली बार शास्त्र के रूप में हुईं अंकित

देव शास्त्र और गुरु हमारे आराध्य हैं। ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी जैन धर्म की पवित्र तिथि है। जिस दिन जिनवाणी माता पहली बार शास्त्र के रूप में अंकित हुईं, इसी कारण से श्रुत पंचमी कहा जाता है। इस दिन जिनवाणी माता का जुलूस निकाल कर विशेष पूजा की जाती है। पढ़िए आर्यिका श्री महायश मति, संघस्

इंदौर Shreephal Jain News 08-06-2024, 08:27 pm

तीर्थंकर भगवान महावीर जन्मकल्याणक पर विशेष निवेदन आलेख : 101 वर्ष से जारी है अहिंसा यज्ञ, हमारी धरोहर-हमारी पहचान

मारोठ में बकरशाला में आज भी बलि के बकरे सुरक्षित रखे जाते है क्यों ? 101 वर्ष पहले मारोठ में एक सेठ हुए श्री बीजराज पाण्ड्या जो एक उत्कृष्ट श्रावक के रुप में अपना जैन दर्शन अनुरुप व्यवसाय करते थे। हमारा आपका भी फर्ज बनता है कि हम मारोठ की जैन समाज को तन-मन का बल मजबूत कर धनबल प्र

इंदौर Shreephal Jain News 13-04-2024, 08:12 pm