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समसामयिक एवं धार्मिक विषयों पर विशेष आलेख

श्रीफल जैन न्यूज पर जानें पूजन और निर्वाण लड्डू चढ़ाने की समस्त विधि : कैसे करें पूजन, कैसे चढ़ाएं निर्वाण लड्डू

जैन समाज में दिवाली एक धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक पर्व है, जो न केवल भगवान महावीर के निर्वाण की स्मृति में मनाया जाता है, बल्कि आत्म-ज्ञान और समाज सेवा का भी प्रतीक है। इस पर्व के माध्यम से जैन अनुयायी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करते हैं। पढ़िए संपादक रेखा स

इंदौर Rekha Jain 30/10/2024, 7:22:44 am

मंगल कलश की स्थापना के पहले तोरणद्वार और मुख्यद्वार को सजाने की विधिः कलश स्थापना के महत्वपूर्ण कार्य के उपरांत पूजन के बारे में अद्भुत जानकारी

मंगल कलश के बारे में पहली श्रंखला में बहुत विस्तार से विधिपूर्वक बताया गया है। पूजन विधि के दूसरे पक्ष में बताया जा रहा है कि जब कलश स्थापित हो जाए तो इसके पहले क्या किया जाए? इसमें घर और दुकान को सजाकर तोरण से सजाने के बारे में बताया जा रहा है। आइए जानते हैं इंदौर से संपादक रेखा

इंदौर Rekha Jain 29/10/2024, 2:34:06 pm

भगवान महावीर के निर्वाण दिवस पर श्रीफल जैन न्यूज की विशेष प्रस्तुति 5 : आत्मज्ञान, मोक्ष और धार्मिक आस्था का पर्व है दीपावली- गणिनी आर्यिका स्याद्वादमती माता जी

जैन धर्म में दीपावली का गहरा आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। इस दिन भगवान महावीर का निर्वाण हुआ था, और इसे जैन समुदाय के लिए मोक्ष और आत्मज्ञान का प्रतीक माना जाता है। जानते हैं दीपावली का वास्तविक अर्थ क्या है, पढ़िए गणिनी आर्यिका स्याद्वादमती माता जी का विशेष आलेख... हम सभी दीप

इंदौर Shreephal Jain News 29/10/2024, 6:00:48 am

भगवान महावीर के निर्वाण दिवस पर श्रीफल जैन न्यूज की विशेष प्रस्तुति -4 : भगवान महावीर ने दिया है स्त्री को अबला नहीं, सबला बनने का संदेश

भगवान महावीर के दिव्य संदेश में हर वर्ग के लिए ज्ञान है। प्रेरणा है। उन्होंने नारी के ब्रह्म तेज का स्मरण करवाते हुए अपना महत्वपूर्ण संदेश देकर नारी को सशक्तीकरण के लिए प्रेरित किया। प्रायः देखने में आता है कि नारी का अपमान, शीलभंग, हिंसा आदि हो रही है। ऐसे में नारी के लिए भगवान

इंदौर Shreephal Jain News 29/10/2024, 5:00:32 am

आध्यात्मिक समृद्धि का प्रतीक है कलश स्थापना : कलश स्थापना की विधि सरल, लेकिन इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ करें

मंगल कलश की पूजा एक महत्वपूर्ण और शुभ अवसर है। इसे भक्ति और श्रद्धा से करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है। पूजन विधि का पालन करते समय ध्यान रखें कि सभी क्रियाएं पूर्ण श्रद्धा के साथ की जाएं। पढ़िए मुनि श्री पूज्य सागर महाराज जी से संपादक रेखा संजय जैन की बातचीत के

इंदौर Rekha Jain 28/10/2024, 2:23:56 pm

भगवान महावीर के निर्वाण दिवस पर श्रीफल जैन न्यूज की विशेष प्रस्तुति -1 : शुभ या कल्याण की भावना पुष्ट होती है स्वस्तिक से

भारतीय संस्कृति में जहां मंदिर में भगवान की पूजा और दर्शन का विधान है, वहीं शुभ प्रतीक चिह्नों को भी पूजा और दर्शन के लिए स्थान दिया है। इनके दर्शन और पूजन से शुभता और आध्यात्मिक विकास का मार्ग खुलता है। पढ़िए दीपावली यानी भगवान महावीर के निर्वाण दिवस पर श्रीफल जैन न्यूज की विशेष

इंदौर Shreephal Jain News 27/10/2024, 6:00:46 am

अहिंसकाहार पद्धति प्रकृति के सिद्धान्तों पर आधारित : भारतीय संस्कृति संरक्षण के लिए खान-पान शुद्धि की आवश्यकता

भारतीय संस्कृति में शुद्ध खान-पान का विशेष महत्व रहा है। जैन संस्कृति में अहिंसा का विशेष महत्व है। अहिंसा सिद्धान्त के सम्बन्ध में हमारे तीर्थंकरों, आचायों ने विशेष उपदेश व योगदान दिया है और जीवन शैली में युग-युगों से आहार शुद्धि का विशेष महत्व रहा है। आहार का सम्बन्ध जीवन से जु

इंदौर Shreephal Jain News 24/10/2024, 12:31:49 pm

शरद पूर्णिमा चंद्रमा की चांदनी में जाप का महत्व : देवी सरस्वती होती हैं प्रसन्न, होती है प्रखर बुद्धि

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की चांदनी में जाप करने से देवी सरस्वती प्रसन्न होती हैं और बुद्धि प्रखर होती है। इस विशेष रात को कौन सा जाप करना चाहिए, यह जानना महत्वपूर्ण है। विधिपूर्वक किए गए इन जपों से ज्ञान का क्षयोपशम बढ़ता है। पढ़िए श्रीफल जैन न्यूज़ से संपादक रेखा संजय जैन का यह व

इंदौर Shreephal Jain News 17/10/2024, 2:47:45 pm

दसलक्षण पर्व पर आज जानिए उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के बारे में : इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण ही ब्रह्मचर्य धर्म- मुनि पूज्य सागर महाराज

उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का तात्पर्य है संयम और आत्म-नियंत्रण के उच्चतम स्तर को प्राप्त करना। यह न केवल शारीरिक संयम को दर्शाता है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संयम को भी शामिल करता है। जैन धर्म में इसे धर्म के सर्वोच्च आदर्श के रूप में देखा जाता है क्योंकि यह आत्मा की शुद्धता और आध्य

इंदौर Shreephal Jain News 17/9/2024, 6:06:08 am

उत्तम आंकिंचन धर्म पर विशेष आलेख: हमारे जीवन मे किंचित मात्र भी, कुछ भी मेरा नहीं है

आज उत्तम आंकिंचन का दिन है और यह धर्म हमें यही सिखाता है की हमारे जीवन मे किंचित मात्र भी कुछ भी मेरा नहीं है इस सांसर मे अगर मेरा कुछ है तो सिर्फ मेरी भगवान आत्मा ही मेरी सब कुछ है बाकी प्रदार्थ सिर्फ संसार मे भ्रमण कराने बाले है, इसलिए हे भव्य आत्मा तुझे आज अपनी आत्मा को समझना

इंदौर Shreephal Jain News 16/9/2024, 2:37:10 pm

दसलक्षण महापर्व (पर्यूषण पर्व), अनंत चतुर्दशी, दसवां दिन 17 सितम्बर : अपनी आत्मा में रमण करना उत्तम ब्रह्मचर्य है

ब्रह्मचर्य जो हमारी साधना का मूल है, सभी साधनाओं में ब्रह्मचर्य को सबसे प्रमुख स्थान दिया गया हैं। आत्मा ही ब्रह्म है उस ब्रह्मस्वरूप आत्मा में चर्या करना सो ब्रह्मचर्य है। जिस प्रकार से एक अंक को रखे बिना असंख्य बिन्दु भी रखते जाइये किन्तु क्या कुछ संख्या बन सकती है? नहीं, उसी प

इंदौर Shreephal Jain News 16/9/2024, 2:30:02 pm

दसलक्षण पर्व पर आज जानिए उत्तम आकिंचन्य धर्म के बारे में : आत्‍मा का ध्‍यान करना ही आकिंचन्‍य धर्म- मुनि पूज्य सागर महाराज

उत्तम आकिंचनता धर्म का अभ्यास व्यक्ति को आत्मिक संतुलन, शांति और जीवन की गहरी समझ की ओर ले जाता है। यह भौतिकता के पार जाकर एक अधिक स्थायी और आंतरिक सुकून की खोज करने की प्रेरणा देता है। पढ़िए मुनि श्री पूज्य सागर महाराज का विशेष आलेख... दसलक्षण धर्म का नवां कदम है आकिंचन्य धर्म।

इंदौर Shreephal Jain News 16/9/2024, 9:06:15 am

पर्यूषण पर्व , 15 सितम्बर, आठवां दिन, उत्तम त्याग धर्म पर विशेष : सुपात्र को दें दान, त्यागें बुरी आदत, समय का दान करना भी जरूरी

दसलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की आराधना की जाती है। जो मनुष्य सम्पूर्ण पर द्रव्यों से मोह छोड़कर संसार , देह और भोगों से उदासीन रूप परिणाम रखता है उसके उत्तम त्याग धर्म होता है । सच्चा त्याग तब होता है जब मनुष्य पर द्रव्यों के प्रति होने वाले मोह , राग ,द्वेष को छ

इंदौर Shreephal Jain News 14/9/2024, 6:42:11 pm

ऐसे करें उपवास की पारणा : सुरक्षित और प्रभावी तरीके से करें उपवास की पारणा, अन्यथा नहीं मिलेगा पूरा फल

दसलक्षण पर्व के दौरान बहुत से श्रावक-श्रावक व्रत या उपवास करते हैं। ऐसे में उपवास की पारणा सही विधि-विधान से करनी आवश्यक है। किसी व्रत या उपवास के दूसरे दिन किया जाने वाला पहला भोजन और तत्संबंधी कृत्य पारणा कहलाता है। व्रत के दूसरे दिन ठीक रीति से पारणा न करें तो पूरा फल नहीं मिल

इंदौर Shreephal Jain News 13/9/2024, 1:52:40 pm

उत्तम संयम धर्म पर विशेष आलेख: अपनी आत्मा को जानना और किसी गलत कार्य मे नहीं जाने देना उस पर नियंत्रण रखना उत्तम संयम धर्म

प्राणी संयम और इन्द्रिय संयम जीवन मैं अगर कर्मो की लगाम लगानी है तो संयम तो अपनाना ही पड़ेगा। प्राणी संयम सभी जीवो पर दया षट काय जीव की रक्षा करना। इन्द्रिय संयम पंच इन्द्रिय जीव और मन को वश मे करना। संयम क्या है अपनी आत्मा को जानना और किसी गलत कार्य मे नहीं जाने देना उस पर नियंत्

इंदौर Shreephal Jain News 13/9/2024, 10:53:12 am

दसलक्षण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म के बारे में जानें : वाणी का करें सदुपयोग ,अप्रिय, कटु, कठोर, शब्द नहीं बोलें

आज उत्तम सत्य धर्म का दिन है। जहां क्षमा , मार्दव , आर्जव , शौच आत्मा का स्वभाव है , वहीं सत्य- संयम- तप त्याग इन गुणों को प्रगट करने के उपाय हैं , या कहें कि ये वो साधन हैं जिनसे हम आत्मिक गुणों की अनुभूति और प्रकट कर सकते हैं। जैसा देखा या सुना हो, उसे वैसा नहीं कहना बताना ही झ

इंदौर Shreephal Jain News 12/9/2024, 7:00:38 am

कहानी उत्तम सत्य धर्म की : हमेशा सत्य का आदर करें

सत्य को अपनाने से व्यक्ति खुद की वास्तविकता और आत्मा की गहराई को समझ सकता है। यह आत्म-साक्षात्कार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होता है। सत्य को जानने और स्वीकार करने से व्यक्ति अपने अस्तित्व और जीवन के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से देख सकता है। आज पढ़िए कहानी उत्तम सत्य धर्म की.. एक

इंदौर Shreephal Jain News 12/9/2024, 6:00:27 am

दसलक्षण पर्व पर आज जानिए उत्तम सत्य धर्म के बारे में : स्वयं की पहचान ही वास्तव में उत्तम सत्य धर्म है-मुनि पूज्य सागर महाराज

जैन धर्म में सत्य को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे सच्चाई और ईमानदारी के रूप में देखा जाता है। जैन ग्रंथों में सत्य को "सच्चा", "निष्कलंक" और "अखंड" कहा गया है। सच्चे और ईमानदार विचार और कर्म की ओर प्रवृत्त होना व्यक्ति के आत्मा की उन्नति के लिए आवश्यक माना जाता है। पढ़िए अंतर्

इंदौर Shreephal Jain News 12/9/2024, 5:00:56 am

जानिए विभिन्न राज्यों में होने वाली विशेष आराधना के बारे में : भाद्रपद मास में आने वाले दसलक्षण पर्व का होता है विशेष महत्व

दसलक्षण पर्व दिगंबर जैन परंपरा में प्रमुखता से मनाया जाता है। यह दस दिनों का एक विशेष धार्मिक उत्सव है। यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी से शुरू होकर चतुर्दशी तक चलता है। इस पर्व का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति करना है। पढ़िए श्रीफल जैन न्यूज की संपादक

इंदौर Shreephal Jain News 8/9/2024, 9:00:28 am

चारूकीर्ति स्वामी की 75वीं जन्मजयंती के उपलक्ष्य में विशेष श्रृंखला-3 : श्रमण संस्कृति के प्रहरी थी चारूकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी- मुनि श्री सुधासागरजी महाराज

श्रवणबेलगोला के समाधिस्थ बड़े स्वामी जी चारूकीर्ति भट्टारक जी को सामाजिक और धार्मिक योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने समाज में नैतिकता, आध्यात्मिकता और अहिंसा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अपने जीवन को जैन धर्म के सिद्धांतों के पालन और शिक्षा में सम

श्रवणबेलगोला Shreephal Jain News 6/9/2024, 2:56:01 pm