सागर। युगपुरुष गणेश प्रसाद जी वर्णी की जीवन स्मृतियों पर वर्णी विकास सभा एवं जनकल्याण समिति, सागर द्वारा प्रकाशित ‘युगदृष्टा’ स्मारिका का विमोचन देशभर में चातुर्मास कर रहे मुनि-आर्यिकाओं के मंगल सान्निध्य में विभिन्न स्थानों पर किया गया। सागर में आचार्य विभवसागर जी, निर्यापक मुनि श्री अभय सागर जी, मुनि श्री पदम सागर जी एवं मुनि श्री शाश्वत सागर जी महाराज के मंगल सान्निध्य में स्मारिका विमोचन कार्यक्रम संपन्न हुआ।
100 से अधिक शिक्षण संस्थानों की स्थापना
युगपुरुष गणेश प्रसाद जी वर्णी ने शिक्षा और संस्कार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए 100 से अधिक विद्यालय एवं महाविद्यालयों की स्थापना की। सागर में स्थित श्री दिगंबर जैन संस्कृत महाविद्यालय, मोराजी भी वर्णी जी द्वारा स्थापित शिक्षण संस्थानों में शामिल है।
वाराणसी, साडूमल, ललितपुर, मड़ावरा, बरुआसागर, द्रोणगिरी, ईसरी, झारखंड सहित अनेक स्थानों पर आज भी उनके द्वारा स्थापित शिक्षण एवं धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से धर्म प्रभावना का कार्य जारी है।
संतों से जुड़ी वर्णी जी की शिक्षण परंपरा
वर्णी जी की शिक्षा परंपरा की विशेषता यह रही कि उनके द्वारा स्थापित शिक्षण संस्थानों से अनेक विद्वान एवं संत जुड़े रहे। आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज एवं आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज भी इन्हीं शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी रहे हैं।
उनकी शिक्षा एवं संस्कार परंपरा आज भी अनेक स्थानों पर धर्म, संस्कृति और अध्यात्म के क्षेत्र में अपना प्रभाव छोड़ रही है।
जन्मस्थली हंसेरा में बना स्मारक
युगपुरुष गणेश प्रसाद जी वर्णी की जन्मस्थली हंसेरा, मड़ावरा, उत्तर प्रदेश में वर्णी विकास सभा द्वारा स्मारक का निर्माण कराया गया है। यहां वर्तमान में नियमित रूप से संस्कार पाठशाला संचालित की जा रही है, जिसके माध्यम से बच्चों को धर्म एवं संस्कारों से जोड़ा जा रहा है।
‘युगदृष्टा’ स्मारिका में जीवन कार्यों का संकलन
स्मारिका के संयोजन का कार्य संस्था के मुख्य संयोजक चंद्रेश शास्त्री, भोपाल ने किया, जबकि प्रकाशक की भूमिका राष्ट्रीय उपाध्यक्ष त्रिलोक शास्त्री, बड़ागांव, बागपत की रही।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. जयंत जैन शास्त्री, सीकर, राजस्थान ने कहा कि स्मारिका युगपुरुष गणेश प्रसाद जी वर्णी द्वारा किए गए कार्यों और उनके जीवन योगदान का बोध कराती है।
राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश जैन टीला द्वारा स्मारिका को देशभर में चातुर्मास कर रहे मुनि-आर्यिका संघों तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।
उद्योगपतियों ने सुनाए वर्णी जी से जुड़े संस्मरण
मीडिया संयोजक मनीष विद्यार्थी ने बताया कि सागर के युवा उद्योगपति कपिल मलैया एवं उद्योगपति संतोष जैन घड़ी को स्मारिका भेंट की गई। इस अवसर पर उन्होंने युगपुरुष वर्णी जी के प्रति अपने समर्पण और जुड़ाव से संबंधित अनेक संस्मरण सुनाए। वरिष्ठ विद्वान पं. पवन कुमार दीवान, राजकुमार शास्त्री, रजपुरा एवं पं. उदय चंद शास्त्री, अंकुर कॉलोनी सहित अन्य लोगों ने भी वर्णी जी से जुड़े अपने संस्मरण साझा किए।
आयोजन में सहयोगियों का योगदान
विमोचन कार्यक्रम में कार्याध्यक्ष विनोद जैन एलआईसी एवं संयोजक राजकुमार जैन कर्द का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
बण्डा की विकास सभा के निर्देशक द्वय अरविंद जैन महुना एवं कडोरी लाल जैन महुना ने वर्णी स्मारक के निर्माण के लिए तन-मन-धन से योगदान दिया।
वर्णी विकास सभा के अधिष्ठाता पं. जीवंधर शास्त्री, जबलपुर ने वर्णी विकास सभा के सभी सहयोगियों की प्रशंसा करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार धर्म प्रभावना के कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
15 अगस्त को बच्चों में मिष्ठान वितरण
‘युगदृष्टा’ स्मारिका प्राप्त होने की खुशी में मोराजी स्नातक सुरेश शास्त्री, परसोरिया ने वर्णी बाल संस्कार केंद्र के विद्यार्थियों को 15 अगस्त के अवसर पर मिष्ठान वितरित करने की घोषणा की।



