सीकर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में प्रतिदिन देव दर्शन पूजन स्वाध्याय कर संघ साधुओं के श्रीमुख से णमोकार मंत्र का उच्चारण सुनते हुए चारों प्रकार के आहार और घर परिग्रहों का त्याग कर 103 वर्षीय सीकर निवासी प्रवासी चेन्नई की 7 प्रतिमाधारी व्रती कमला देवी स्वर्गीय रतन लाल जी का देह परिवर्तन 5 अक्टूबर की रात्रि को हो गया। उनकी विमानडोला यात्रा मंगलवार को दंग की नसिया से नगर के प्रमुख मार्गो से हुए मुक्ति धाम पहुंची। यहां पर परिजनों ने अंतिम अग्नि संस्कार किए। परिवार के विनोद, प्रदीप अनुसार कमला देवी ने पति श्रेष्ठी रतनलाल के 70 वर्ष पूर्व निधन होने से अनेक पारिवारिक आघात होने पर हिम्मत से पुत्रों को संस्कारित किया।

आचार्य श्री से ग्रहण किए 7 प्रतिमा के नियम

स्वयं ने भी लौकिक जिम्मेदारी के बाद पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से 25 वर्षों पूर्व 7 व्रत प्रतिमा के नियम अंगीकार किए।आप आचार्य श्री धर्म सागर जी, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ में नियमित रूप से आहार चौका लगाती रहीं। आचार्य श्री के सीकर चातुर्मास में कलश स्थापना की बोली, दश लक्षण पर्व में पूजन सामग्री, विभिन्न धार्मिक प्रतियोगिताओं के पुण्यार्जक आदि चारों प्रकार के दान आपने, धाकड़ा परिवार ने दिए। अपने 103 वर्ष के जीवन में अनेक व्रतों के हजारों उपवास किए। आपके त्याग मय जीवन से प्रभावित होकर आपकी पुत्रवधू अंजना महेंद्र ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर से 5 व्रत प्रतिमा के नियम सीकर में कुछ माह पूर्व लिए।

समाधिमरण देह परिवर्तन पर श्रद्धांजलि अर्पित की

दिन रात मेरे स्वामी मैं भावना ये भाऊँ। देहांत के समय में तुमको न भूल जाऊँ। शत्रु अगर कोई हो संतुष्ट उनको कर दूँ। समता का भाव धरकर सबसे क्षमा कराऊँ। त्यागू आहार पानी औषध विचार अवसर। टूटे नियम न कोई दृढ़ता हृदय में लाऊँ। जागे नहीं कषायें नहीं वेदना सतावें। तुमसे ही लौ लगी हो दुर्ध्यान को भगाऊँ। आतम स्वरूप अथवा आराधना विचारूँ। अरहंत सिद्ध साधु रटना यहीं लगाऊँ। धरमात्मा निकट हों चरचा धरम सुनावें। वह सावधान रक्खे गाफिल न होने पाऊँ। जीने की हो न वांछा मरने की हो न इच्छा। परिवार मित्रजन से मैं राग को हटाऊं। भोग जो भोगे पहले उनका न होवे सुमरन । मैं राज्य संपदा या पद इन्द्र का न चाहूँ। जैन दर्शन में समाधि की उत्कृष्ट भावना मनुष्य जीवन में बिरले पुण्यशाली ही कर पाते हैं। आपके समाधिमरण देह परिवर्तन पर सीकर एवं अन्य नगरों से काफी संख्या में महती उपस्थिति से भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।