इंदौर। मोक्ष मार्ग के नेता और सज्जन पुरुषों को किसी सलाहकार की जरूरत नहीं होती, धर्म क्षेत्र में कोई सलाहकार नहीं होता। लेकिन राजनीति के नेताओं को सलाहकार की जरूरत होती है। मुनिश्री सुधासागर जी ने शुक्रवार की धर्मसभा में यह बात कही। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी इस संसार में मोक्ष मार्ग के सबसे बड़े नेता थे। उन्होंने कभी भी किसी से सलाह नहीं ली उन्होंने जो भी किया वह सब अपनी बुद्धि और विवेक से किया। वे सदैव संसार के सभी जीवो के लिए सुख की कामना करते थे और प्रत्येक जीव आत्मा को भगवान मानते थे। उन्होंने कहा कि गुरु का अर्थ है मालिक-स्वामी जिसके अभाव में तुम अपने को अनाथ और भाव में सनाथ महसूस करो वही गुरु है और सच्चे मन से जिसे तुम गुरु मान लो वही तुम्हारा गुरु है। व्यक्ति अपनों से अपनों के बीच में अपनों से ही धोखा खाता है।
दुनिया में जो दूसरों के सुख से दुखी है वह भिखारी है
दुनिया में ज्ञानचंद, रायचंद और हुकमचंद यह तीन व्यक्ति सबसे ज्यादा खतरनाक हैं, इनसे सावधान रहें। शेर कुत्तों से नहीं डरता, दुनिया में कुत्ता ही एक मात्र ऐसा जीव है जो अपनी ही जाति के जीव को देखकर गुर्राता है, भोंकता है। जो भाई-भाई पर गुर्राता हो वह भी वही है। दुनिया में जो दूसरों के सुख से दुखी है वह भिखारी है और जो अपनी मेहनत की रोटी खाए वह सुखी और खुशनसीब है। दुनिया में कहीं भी दुख और विफलता नहीं ह।ै इस शब्द को सोच को अपने मन से निकाल दो।
यह उपस्थित रहे
धर्मसभा में अनेक स्थानों से पधारे श्रावकों एवं समाज के रितेश पाटनी, मयंक जैन, आकाश, आलोक कोल, अरविंद, अखिलेश सोधिंया, संदीप जैन गिन्नी, सचिन कोल, अर्पित वाणी आदि समाज जन उपस्थित थे। धर्मसभा का संचालन सोनाली बगड़ि़या ने किया।






