अयोध्या। बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती श्री शांतिसागर जी महाराज का जैन संस्कृति के संरक्षण और धर्म प्रभावना में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी परंपरा में गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी ने भी धर्म, संस्कृति और तीर्थ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। इसी परंपरा से जुड़े संघस्थ शिष्य बाल ब्रह्मचारी विजय कुमार जैन जी का जीवन धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है।
धार्मिक संस्कारों में हुआ पालन-पोषण
विजय कुमार जैन जी का जन्म श्रावण शुक्ला सप्तमी, वर्ष 1975 में कानपुर के एक धार्मिक परिवार में हुआ। उनके पिता श्री प्रकाश चंद जैन एवं माता श्रीमती कुमुदिनी देवी जैन हैं। गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की गृहस्थ अवस्था की बहन विजय जी की माताजी हैं।
विजय जी की तीन बहनें हैं, जिनमें दो विवाहित हैं तथा एक बहन बा. ब्र. बीना बहन जी गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के संघ की संघसंचालिका हैं। उनके भाई संजय जैन व्यवसाय से जुड़े हैं।
धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं में सक्रिय भूमिका
विजय कुमार जैन जी वर्तमान में अनेक धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के महत्वपूर्ण दायित्वों से जुड़े हुए हैं। वे भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र उत्तर प्रदेश के मंत्री तथा दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप हस्तिनापुर के प्रबंधमंत्री हैं।
इसके साथ ही वे तीर्थंकर ऋषभदेव तपस्थली प्रयागराज के सदस्य एवं ट्रस्टी, श्री ज्ञानतीर्थ शिर्डी (महाराष्ट्र), भगवान पुष्पदंतनाथ जन्मभूमि काकंदी (गोरखपुर), तीर्थंकर जन्मभूमि विकास समिति हस्तिनापुर से जुड़े हुए हैं।
अयोध्या में भी महत्वपूर्ण दायित्व
विजय जैन जी भगवान ऋषभदेव दिगम्बर जैन बड़ीमूर्ति मंदिर अयोध्या दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के मंत्री सहित अनेक धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। विभिन्न संस्थाओं से जुड़कर वे तीर्थ संरक्षण, धार्मिक गतिविधियों और समाज को संगठित करने के कार्यों में सक्रिय रहते हैं।
साहित्य एवं पत्रकारिता में भी योगदान
विजय जैन जी का योगदान केवल धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं तक सीमित नहीं है। उन्होंने जैन साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई है।
उनके संपादन में ‘सम्यज्ञान’ मासिक पत्रिका, युवा परिषद बुलेटिन, कुण्डलपुर स्मारिका तथा ‘वीर ज्ञानोदय ग्रंथमाला’ हस्तिनापुर सहित विभिन्न प्रकाशनों का संपादन कार्य हुआ है। उनके माध्यम से जैन धर्म, तीर्थ, संस्कृति और युवा गतिविधियों से संबंधित विषयों को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
राष्ट्रीय स्तर पर रहा संपर्क
विजय जैन जी का विभिन्न राष्ट्रीय एवं सामाजिक स्तर के प्रमुख व्यक्तित्वों से समय-समय पर संपर्क रहा है। वे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, रक्षामंत्री सहित केंद्रीय एवं राज्य सरकार के अनेक मंत्रियों से विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं तीर्थ संबंधी विषयों को लेकर मुलाकात कर चुके हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणादायी व्यक्तित्व
धार्मिक संस्कारों के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन, तीर्थ क्षेत्रों से जुड़ाव, साहित्य एवं पत्रकारिता में सक्रियता और विभिन्न संस्थाओं में महत्वपूर्ण दायित्व संभालने के कारण विजय कुमार जैन जी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी व्यक्तित्व के रूप में सामने आते हैं।
गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के संघस्थ शिष्य के रूप में वे धार्मिक परंपराओं, जैन संस्कृति और तीर्थ संरक्षण के कार्यों से जुड़े हुए हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि युवा शक्ति को धर्म, संस्कृति, समाज और राष्ट्रहित के सकारात्मक कार्यों में लगाया जा सकता है।
धर्म एवं संस्कृति संरक्षण की दिशा में योगदान
विजय जैन जी का विभिन्न धार्मिक संस्थाओं से जुड़ाव और जैन साहित्य के क्षेत्र में योगदान जैन संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। तीर्थ क्षेत्रों के विकास, धार्मिक साहित्य के प्रकाशन तथा सामाजिक गतिविधियों में सहभागिता के माध्यम से वे समाज के बीच सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।



