रत्नात्रयगिरि अतिशय क्षेत्र पावई का जारी है जीर्णोद्वार : नवम्बर में होगा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव
संवाददाता: Reporter: Shree Phal News•इंदौर•16/1/2026, 12:47:03 am

आगामी नवंबर में आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज के सानिध्य में अद्वितीय अस्मरणीय ऐतिहासिक महापंचकल्याण का आयोजन होने जा रहा है। पावई कमेटी एवं गोलालारे समाज ने सकल जैन समाज से आग्रह किया। भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की खबर...
भिंड। नगर से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रत्नात्रयगिरि अतिशय क्षेत्र पावई अति प्राचीन है। यहां से दिगंबर जैन समाज के दो गोत्र जिसमें गोलारारे और ख़रुआ उत्पत्ति का बताया गया है। यह क्षेत्र लगभग 2000 से ज्यादा वर्ष प्राचीन है और यहां पर दिगंबर जैन मंदिर था, जिसका प्रमाण यह है कि यहां वहां प्राचीन जिन मंदिरों के अवशेष मिलते हैं। जिनके दर्शन करने के लिए आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज जी ने बताया कि यह मंदिर जीर्णोद्धार के लिए हैं। इसका जीर्णोद्धार कराया जाए। इसी क्रम में पट्टाचार्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज भी अति प्राचीन क्षेत्र के दर्शन के लिए पधारे उन्होंने भी यही बताया। आचार्य श्री विराग सागर महाराज ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए कहा और उन्हीं के आदेश अनुसार यहां पर एक भव्य 5 शिखरों वाला भव्य जिनालय बनकर तैयार हो चुका है। जिसमें पांच अद्भुत वेदियां बनकर तैयार हो चुकी है। जिस पर श्रीजी की प्रतिमाएं विराजमान होगी और साथ में ही यहां पर अद्भुत अविस्मरणीय मान स्तंभ भी बनने जा रहा है, जो 24 प्रतिमाओं से युक्त होगा इसके साथ ही यहां पर जो अतिप्राचीन भगवान नमिनाथ की प्रतिमा है। वह दिन में तीन बार रंग बदलती है, ऐसा समाज के लोगों द्वारा बहुत बार देखा है इसके साथ ही आगामी नवंबर में आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज के सानिध्य में अद्वितीय अस्मरणीय ऐतिहासिक महापंचकल्याण का आयोजन होने जा रहा है। पावई कमेटी एवं गोलालारे समाज ने सकल जैन समाज से आग्रह किया। इस आयोजन में भाग लेकर पुण्य लाभ कमाए।
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