सीकर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में श्री पद्मप्रभु जिनालय में पंचामृत अभिषेक हुआ। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी दंग की नसिया पारस भवन में विराजित हैं। सोमवार को प्रातः आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के आहार के साथ तपस्वी मुनिराज श्री ध्येय सागर जी महाराज एवं आर्यिकाश्री जिनेश मति माताजी का महापारणा एवं ज्योति जैन सनावद का भी पारणा हुआ। इस अवसर पर लौकिक अवस्था के सैकड़ों परिजन आनंदपुर कालू मेड़ता सिटी, कोलकत्ता, आसाम, हैदराबाद ,विजयनगर ,सनावद, कसरावद,इंदौर, बडवाह आदि नगरों से पधारे। दोपहर को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित पंडित धर्मचंद शास्त्री के साथ 1008 श्री पद्म प्रभु जिनालय गए। जहां उपस्थित पुरुष एवं महिलाओं ने आचार्य संघ सान्निध्य में पंचामृत अभिषेक किया। आचार्य श्री एवं मुनि श्री हितेन्द्र सागर जी द्वारा मंत्रोच्चार किए गए।
श्रावक श्राविकाओं के लिए श्रावकाचार ग्रंथ है
इस अवसर पर आचार्य श्री ने आशीर्वचन में बताया कि जिनागम में मुनियों के लिए महाव्रत की भांति श्रावक श्राविकाओं के लिए श्रावकाचार ग्रंथ है। पदम प्रभ मंदिर में आगम अनुरूप पंचामृत, महिला अभिषेक देखकर प्रसन्नता हुई। महिलाएं साधुओं को लिए आहार तैयार कर आहार देती हैं। इसी प्रकार श्रावक धर्म का पालन कर अभिषेक भी करती हैं। डॉ. राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि पंडित धर्मचंद जी शास्त्री गुरुजी सीकर संघ में वर्षों से शास्त्र स्वाध्याय करा रहे हैं। अब उन्हें वैराग्य संयम धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। अब समय आ गया है कि आगम से प्राप्त ज्ञान को जीवन में चरितार्थ करें इसी नगर में पंडित राजमल ने भी वर्षों तक स्वाध्याय के बाद मुनि दीक्षा अंगीकार की। विगत कुछ माह पूर्व सीकर में प्रभाष सागर जी ने दीक्षा ली। उनकी भी यही भावना है कि मेरी समाधि आचार्य श्री धर्म सागर जी की समाधि स्थल पर हो। उनके पुण्य संयोग से से सीकर में ही दीक्षा का अवसर उन्हें मिला।




