दमोह (कुण्डलपुर)। निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने आचार्य समंतभद्र महाराज विरचित ‘रत्नकरण्डक श्रावकाचार’ के पद्यानुवाद ‘रयणमंजूषा’ के स्वाध्याय के दौरान कहा कि मनुष्य को स्वप्न और सत्य, कल्पना और वास्तविकता तथा जीव और शरीर के बीच का अंतर समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सम्यक ज्ञान ही भेद विज्ञान की प्राप्ति का मार्ग है। इसी के माध्यम से व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानकर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
सपना अपना-सा लगता है, पर अपना नहीं होता
प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ एवं प्रचारमंत्री जयकुमार जैन ‘जलज’ ने बताया कि मुनि श्री ने दोहे—“दिन का हो या रात का, सपना सपना होय, स्वप्न अपना-सा लगे, किंतु न अपना होय”—की व्याख्या करते हुए कहा कि सपना सदैव सपना ही रहता है, सत्य नहीं बन जाता।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जागृत अवस्था में भी धन, संपत्ति, प्रतिष्ठा और इच्छाओं को अपना मानकर उनके पीछे दौड़ता रहता है, जबकि केवल कल्पना से वास्तविक सुख प्राप्त नहीं होता। गर्मी से व्याकुल व्यक्ति को सपने में झरना दिखाई दे सकता है, लेकिन जागने पर प्यास और गर्मी यथावत रहती है।
यथार्थ को समझना जरूरी
मुनि श्री ने वर्ष 2019 में नेमावर में हुए एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी बात को स्वीकार करने से पहले उसके यथार्थ को समझना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि आचार्यश्री ने भजन की एक पंक्ति पर सहज प्रश्न कर यह समझाया था कि जब नींद नहीं आई, तो स्वप्न दिखाई देने की बात पर विचार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अपनेपन का अनुभव होना और वास्तव में किसी वस्तु का अपना होना अलग-अलग बातें हैं। इस अंतर को समझना ही भेद विज्ञान है।
जीव और शरीर का स्वरूप अलग
मुनि श्री ने दूध-पानी के उदाहरण से अलग-अलग गुणधर्मों की पहचान का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जीव चेतन तत्त्व है, जिसमें ज्ञान, दर्शन एवं सुख-दुःख की अनुभूति करने की क्षमता है, जबकि शरीर पुद्गल से बना जड़ तत्त्व है।
जीव कर्मों के बंधन के कारण शरीर धारण करता है, किंतु जीव और शरीर को एक मान लेना अज्ञान है। राग-द्वेष एवं कर्मबंध से मुक्त होने की साधना ही आत्मकल्याण का मार्ग है।
24 अक्टूबर को पहुंचेगी अहिंसा वाहन रैली
शरद पूर्णिमा की पूर्व बेला पर आयोजित गुरु परंपरा समर्पण समारोह का शुभारंभ 24 अक्टूबर को विशाल अहिंसा वाहन रैली के कुण्डलपुर आगमन से होगा। दमोह, हटा, बांदकपुर, पथरिया, बनबार, अभाना, बटियागढ़, नोहटा, तेजगढ़, तेंदूखेड़ा, जबेरा और कुम्हारी सहित विभिन्न क्षेत्रों से गुरु भक्त दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों से कुण्डलपुर पहुंचेंगे।
कार्यक्रम में बड़े बाबा का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, मुनिसंघ की आहारचर्या, ध्वजारोहण, मंगल देशना, भक्तामर दीप अर्चना और महाआरती आयोजित होगी।
श्रीफल साथी : राजीव सिंघई, कुण्डलपुर





